अदभुत झील:रहस्यमय लोनार झील

परिवेश , 1061

दुनिया के कुछ झील अपने क्रिस्टल क्लीअर नीले पानी के लिए प्रसिद्ध हैं, तो कुछ झील अपने आकार के लिये, कुछ अपने प्राकृतिक सौंदर्यों के लिए, भारत के महाराष्ट्र राज्य में भी एक झील ऐसी है, जो विश्व में अपने एक अनोखे और अद्भुत कारण के लिए प्रसिद्ध है.  

यह झील दुनिया में इसलिए प्रसिद्ध है कि इस लोनार झील का निर्माण एक उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था. ये बात जानकर  आपको हैरानी भी हो सकती है. मन में सवाल उठ सकता है  क्या ये बात सोलह आने सच है ? लेकिन दुनिया के बड़े – बड़े वैज्ञानिकों ने इस बात पर अपनी मुहर लगाई हैं कि इस झील का निर्माण उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने से ही हुआ था. हालांकि ये सुनकर मन में एक अजीब सा कौतूहल पैदा होता है कि यह झील कैसी होगी ?
बावन हजार साल पहले एक घटना घटी, जिसका परिणाम विनाशकारी था, घटना यह थी कि 20 लाख टन की उल्का पिंड पृथ्वी की तरफ बीस किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से आकर पूर्व से 30 अंश कोण में पृथ्वी से टकराया. ,इस वजह से वहा उल्का से निर्मित एक गड्ढा निर्माण हुआ. पृथ्वी से टकराने के बाद उल्कापिंड तीन हिस्सों में टूट चुका था और उसने लोनार के अलावा अन्य दो जगहों पर भी झील बना दी. हालांकि अब अन्य दो झीलें पूरी तरह सूख चुकी है पर लोनार में आज भी पानी मौजूद है.
प्रकृति ने इस विशालकाय गड्ढे को एक अनोखे सरोवर में बदल दिया. ‎यह खूबसूरत, अदभुट और सुंदर झील  समुद्र तल से 1,200 मीटर ऊँची सतह पर लगभग 100 मीटर के वर्ग में फैला हुआ है.  इस झील का व्यास क़रीब 1.8 किलोमीटर हैं. ये झील 5 से 8 मीटर तक सिर्फ खारे पानी से भरी हुई है झील की गहराई लगभग 500 मीटर है. कहा जाता है की, सरोवर के पानी में समय समय पर बदलाव होते, यह झील अन्तरिक्ष विज्ञान की एक ऐसी उन्नत प्रयोगशाला है, जहा पर कई राज छिपे हुए हैं.इस जगह पर समूचे विश्व की निगाह है. अमरीकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा का मानना है कि, बेसाल्टिक चट्टानों से बनी यह झील बिलकुल वैसी ही है, जैसी झील मंगल की सतह पर पायी जाती है, यहाँ तक कि, इसके जल के रासायनिक गुण भी मंगल पर पायी गयी झीलों के रासायनिक गुणों से मिलते जुलते हैं. लोनार सरोवर बेसॉल्ट खड़क में बना एक मात्र बड़ा सरोवर है. सरोवर के परिसर में चुंबकीय खड़क और स्पटिक मिलते है. इस झील से ओज़ोन वायु तैयार होता है. सरोवर के आसपास बहुत सारे औषधीय पेड़ पौधे है और इस सरोवर के पानी में अनेक प्रकार के क्षार होने के कारण ये पानी त्वचा रोग पर बहुत गुणकारी है. इसके पानी में क्षार की अधिक मात्रा होने के कारण इसमें भी जलचर प्राणी नहीं है और इसमें कोई  नहीं रह सकता.                  यह बात सोचकर बड़ा अच्छा लगता है की, एक टूटे हुए तारे के जमीन पर गिरने से ये सूंदर झील बन गई है. ये झील सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अब दुनिया में प्रसिद्ध हो चुकी है. लगभग वर्ष 2006 के आस पास लोनार झील में अजीब हलचल हुई. झील का पानी अचानक भाप बनकर उड़ने लगा.  समीपवर्ती लोगों ने झील में पानी की जगह नमक और अन्य खनिजों के चमकते  टुकड़े  देखे. बाद में लोनार झील का पानी रंग बदलने लगा. बाद में इस झील के पानी के रंग बदलने का भी खुलासा हुआ. बताया गया कि पानी में हालोआर्चिया जीवाणुओं के बड़ी संख्या में उपस्थिति के कारन उसका पानी गुलाबी हो गया . वैज्ञानिको ने बताया कि हालोआर्चिया एक ऐसा जीवाणु होता है जो गुलाबी रंग पैदा करता है और वह खारे पानी में जीवित रह सकता है.
 ‎इस झील को दो नदियों, पूर्णा और पेंगंगा का पानी भरा हुआ रखता हैं. बारिश के अलावा इन दो नदियों से ही इस सरोवर में पानी आता है. इस सरोवर के किनारे ही स्थापित कई मंदिर इसके इतिहास को बखूबी दर्शाते हैं.     
अभी भारतीय वैज्ञानिकों के साथ-साथ नासा के वैज्ञानिक भी इस झील के रहस्यों को सुलझाने में लगे है. अभी और भी कई बातों का सामने आना बाकी है, क्योंकि इस झील से जुड़ा एक रहस्य खुलता है, तो उसके साथ एक और नया रहस्य सामने आ जाता है. इस संबंध में न केवल भारत सरकार ही नहीं  बल्कि दुनिया भर के वैज्ञानिक खोज में लगे हुए हैं. भारत और अमेरिका के भूगर्भ सर्वक्षण विभाग, नासा से लेकर स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ वाशिंगटन के तमाम वैज्ञानिकों को इस झील ने हैरानी में डाल दिया है.  इस रहस्यमय, अद्भुत, खूबसूरत झील का नज़ारा देखने के लिए आपको महाराष्ट् में जाना पड़ेगा और यात्रा के लिए सर्दियों में और बारिश में जाना अच्छा रहेगा, क्योंकि यहा गर्मियों में बहुत गर्म वातावरण रहता है. इस मौसम में झील के चारों तरफ हरी घास होने की वजह से यह जगह शांत और मन को सुकून  देने वाली लगती है.

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