*बुद्धम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि*

परिवेश , 1096

*बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई*

*कपिलवस्तु ( नेपाल तराई) के राजा "शुद्धोदन" एवं रानी "महामाया" से ईशा पूर्व 563 में लुम्बिनी ( वर्तमान सिद्धार्थनगर के पास) के वन क्षेत्र में परम तेजस्वी बालक सिद्धार्थ का जन्म हुआ। राजसी सुख सुविधा से संपन्न जीवन भी सिद्धार्थ को आकर्षित न कर सका।सुलक्षणा पत्नी "यशोधरा" एव दुधमुहे बालक "राहुल" को सोता छोड़कर, उन्होंने मानव जीवन की पीडा-मुक्ति के प्रश्नों के उत्तर खोजने हेतु रात्रि में चुपचाप गृह-त्याग किया।*

 *"रोग,जरा और मृत्यु" को देखकर विचलित हुए सिद्धार्थ ने इनका उत्तर खोजने के लिए कठोर तप किया। लगभग 12 वर्ष बाद (35 वर्ष की आयु में) ग्राम वधुओं के एक गीत को सुनकर को उन्हें "मध्य मार्ग" की श्रेष्ठता का बोध हुआ। जिस पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को बोध मिला वह *बोधि वृक्ष" कहलाया उस स्थान को आज "बोधगया" के नाम से जाना जाता है।*

*उन्होंने अपने उपदेश से सारी मानवता को प्रकाशित किया। जीवन में शांति के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया।वे अहिंसा के प्रबल पक्षधर थे। यज्ञ और पशु बलि के विरोधी थे। उन्होंने मुख्यतः "ध्यान और अंतर्दृष्टि", "मध्य मार्ग" का अनुसरण, "चार आर्य सत्य" और "अष्टांग मार्ग" अपनाने की शिक्षा दी। उन्होंने "अविद्या" को दुख का कारण माना और "कार्य कारण" संबंध  को महत्ता दी।*

*महात्मा बुद्ध द्वारा सुझाए गए मार्ग की उपादेयता इसी से सिद्ध है कि आज दुनिया की एक चौथाई से अधिक जनसंख्या उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए बौद्ध धर्म के उपदेश और सिद्धांत को अपना जीवन आधार मानती है। भारत में तो उनको भगवान विष्णु के अवतार के रूप में स्वीकार किया जाता है। बौद्ध धर्म की सर्वस्वीकार्यता , धार्मिक सिद्धांतों एवं दार्शनिक सिद्धांतों की सार्वभौमिक लोकप्रियता,  पंचशील का मार्ग, कार्य कारण संबंध एवं तर्क पर आधारित जीवन पद्धति हम सभी के लिए आदर्श और अनुकरणीय है।* 

*अपनी 80 वर्ष की अवस्था तक उन्होंने लगभग पूरे भारतवर्ष में स्वयं भ्रमण कर एवं अन्य देशों में अपने शिष्य  एवं श्रमण भेजकर बौद्ध धर्म की शिक्षा का प्रचार प्रसार किया। मानवता के कल्याण और श्रेष्ठता के लिए उनके त्याग एवं प्रयास पूरी मानवता के लिए सदैव स्तुत्य रहेंगे।* 

*बुद्ध पूर्णिमा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई*
@रीना त्रिपाठी
महामंत्री
भारतीय नागरिक परिषद।

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