लखनऊ में आयुष्मान कार्ड घोटाले का आरोप: सामाजिक कार्यकर्ता के नाम पर फर्जी कार्ड, पीएम-सीएम से जांच की मांग

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लखनऊ।
राजधानी लखनऊ में आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर ने उनके नाम पर कथित रूप से फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाए जाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
दिनकर कपूर ने अपने पत्र में बताया कि उनका इलाज किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में कोलन कैंसर के लिए चल रहा है और वे पिछले दो महीनों से अस्पताल में भर्ती हैं। इलाज के दौरान जब उन्होंने कैंसर कार्ड बनवाने के लिए आवेदन किया, तब अस्पताल प्रशासन ने उन्हें सूचित किया कि उनके नाम से पहले से ही आयुष्मान कार्ड जारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्ड उनके आधार नंबर पर बनाया गया है, लेकिन उसमें परिवार के सदस्यों के रूप में कुछ अज्ञात लोगों—दिनेश मिश्रा, इंदू मिश्रा, संयुक्ता मिश्रा और शारदामनी—के नाम दर्ज हैं, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। इतना ही नहीं, कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर भी उनका नहीं, बल्कि हुसैनगंज क्षेत्र की एक आशा कार्यकर्ता का बताया जा रहा है।
कपूर के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर यह जानकारी मिली कि पूर्व में कुछ लोगों की मिलीभगत से इस प्रकार के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए आवेदन नहीं किया और कार्ड पर लगी फोटो भी उनकी नहीं है।
उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि यदि इसकी व्यापक जांच कराई जाए तो आयुष्मान योजना में बड़े स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला उजागर हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि फर्जी आयुष्मान कार्ड को तत्काल निरस्त किया जाए और इस घोटाले में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
दिनकर कपूर ने सरकार से अपील की है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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