मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद एसआई दया शंकर को लूट के मामले में फंसाए जाने को लेकर नहीं दर्ज हो रही है एफआईआर

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कानपुर नगर / लखनऊ : कानपुर नगर पुलिस लाइन में तैनात एसआई दया शंकर वर्मा का कहना  हैं कि जब वे अगस्त 2014 में बर्रा थाने में हेड कांस्टेबल के रूप में तैनात थे तब उनको थाना प्रभारी द्वारा पांच अन्य पुलिसकर्मियों के सहयोग से एक लूट के मामले में साजिशन फंसा दिया गया था जिसके चलते उनको निलंबित किया गया और जेल भेज दिया गया। इसके बाद वे विभागीय जांच में निर्दोष पाए गए लेकिन साजिशकर्ता पुलिसकर्मियों के खिला़फ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
               पीड़ित उप निरीक्षक  दया शंकर वर्मा ने आगे बताया कि इस मामले में उन्होंने जुलाई 2017 में   मा.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मुलाकात किया था और अपने निर्दोष होने का प्रमाण दिया जिसके बाद साजिशकर्ता पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत करने का उनके यहां से  आदेश भी  हुआ लेकिन इसके बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिछले साल अक्टूबर माह में पीड़ित दया शंकर वर्मा ने कानपुर नगर पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्त असीम अरुण के समक्ष प्रस्तुत होकर प्रार्थनापत्र दिया जिसे उन्होंने जांच के लिए एडीसीपी ( पूर्वी ) सोमेंद्र मीणा को सौंप दिया , जांच पूरी हो गई लेकिन कार्रवाई के नाम पर मौन साधना जारी है जिससे ‘ कानून का राज ’ पर प्रश्न चिन्ह लग रहा हैं।अब सवाल उठता है मुख्यमंत्री के यहां से आदेेश होने के बावजूद वे कौन से अदृश्य कारण हैं कि पीड़ित उप निरीक्षक दया शंकर वर्मा को लूट के मामले में बर्रा थाने के प्रभारी एवं अन्य पुलिसकर्मियों  द्वारा साजिशन फंसाए जाने को लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही हैं। 
*** नैमिष प्रताप सिंह

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