अदभुत सांप : जो करता है शिव पूजा
परिवेश Jun 13, 2020 at 02:30 PM , 681मनुष्य द्वारा देवी-देवताओं की आराधना करना एक आम प्रचलन है. हर सम्प्रदाय के लोग आपने अपने आराध्य की पूजा आराधना करते हैं.लेकिन अगर यही गुण किसी पशु या अन्य जीव में दिखाई दे तो इसे किसी आश्चर्य से कम नहीं समझा जाता. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को नाग बहुत प्रिय हैं. शिव के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव श्मशान में निवास करते हैं. शरीर पर भस्म लगाते हैं. गले में नाग को धारण करते हैं. महादेव के इस स्वरूप में कहीं न कहीं गहरे रहस्य भी छिपे हैं. भगवान शिव के गले में लिपटा नाग इस बात का संकेत है कि भले ही कोई जीव कितना भी जहरीला क्यों न हो, पर्यावरण संतुलन में उसका भी महत्वपूर्ण योगदान है. भगवान् शिव अपने गले में हार के स्थान पर नाग को ही धारण करते हैं. भारत में भी नागपंचमी के दिन नागों की पूजा की जाती है. भगवान विष्णु शेष नाग की शैया पर शयन करते हैं. क्या भगवान का नागों से विशेष संबंध है ? विज्ञान और अध्यात्म की इस बारे में अलग राय हो सकती है लेकिन कुछ घटनाएं पुनः इस प्रश्न पर चिंतन के लिए विवश कर देती हैं. कहते हैं कि वासुकी नाग शिव के परम भक्त थे. इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने इन्हें नागलोक का राजा बना दिपया और साथ ही अपने गले में आभूषण की भांति लिगपटे रहने का वरदान दियया.
उत्तरप्रदेश के आगरा के पास स्थित एक गांव है सलेमाबाद. इस गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पिछले करीब पन्द्रह वर्षों से एक नाग रोज आकर भगवान शिव को नमन और उनकी पूजा करता है.
इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु शिवजी की पूजा करने आते हैं, लेकिन नाग का इस तरह आना जिज्ञासा का विषय बना हुआ है. यह नाग रोज मंदिर में आता है और करीब पांच घंटे तक यहां रुकता है
नाग सुबह दस बजे आता है और शाम को तीन बजे वापस लौट जाता है. इस अवधि में यह शिवलिंग के पास ही बैठा रहता है. यहां आसपास के गांवों में भी इस नाग की चर्चा है. इससे श्रद्धालुओं को कोई भय नहीं है और न इसने कभी किसी को नुकसान पहुंचाया. न ही किसी श्रद्धालु ने इस नाग को कभी नुक्सान पंहुचाया. हालांकि नाग के मंदिर में प्रवेश करने के बाद मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं. इस दौरान कोई और व्यक्ति मंदिर में प्रवेश नहीं करता. तीन बजने के बाद नाग अपने आप वहां से चला जाता है.
उसके बाद ही लोग मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने जाते हैं. किसी सर्प का इतनी लंबी अवधि से रोज मंदिर में आकर शिवलिंग के पास रुकने को यहां के लोग आश्चर्य से ज्यादा श्रद्धा का विषय मानते हैं.































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