कोरोना का डरः नोएडा अस्थियां लेने नहीं पहुंच रहे हैं परिजन, सभी लॉकर फुल, अब बाहर रखे जा रहे हैं अस्थि कलश -*

हेडलाइंस , 460
 नोएडा !
दाह संस्कार के बाद परिजन अस्थियां लेने शवदाह गृह नहीं जा रहे हैं
इस वजह से अस्थियां रखने के लिए बने लॉकर भर गए हैं
जनपद में पिछले 10 दिन में करीब 900 मृतकों की अंत्येष्टि की जा चुकी है
अप्रैल महीने में 1200 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया गया है

कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से जिंदगी ठहर सी गई है। लोग डर-डर कर जी रहे हैं। गौतमबुद्ध नगर में इसका खौफ लोगों में घर कर गया है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि दाह संस्कार के बाद परिजन अस्थियां लेने शवदाह गृह नहीं जा रहे हैं। इस वजह से अस्थियां रखने के लिए बने लॉकर भर गए हैं। शवदाह गृहों में खाली जगहों पर अस्थि कलश को व्यवस्थित ढंग से रखा जा रहा है। उन सब की अलग-अलग पहचान की जा रही है। ताकि बाद में जब परिजन उन्हें लेने आएं, तो ज्यादा असुविधा न हो। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक अस्थियां शवदाह गृह में पड़ी रहेंगी।

*12 से बढ़कर 90 हो गई है संख्या*

दरअसल अप्रैल महीने में गौतमबुद्ध नगर में कोरोना की वजह से मौतों के आंकड़ों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को ही 15 मरीजों की जान गई थी। जनपद में पिछले 10 दिन में करीब 900 मृतकों की अंत्येष्टि की जा चुकी है। जबकि पूरे अप्रैल महीने की बात करें, तो 1200 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। इससे पहले फरवरी और मार्च में रोजाना महज 10 -12 शवों का दाह संस्कार किया जा रहा था। लेकिन अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक अब संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। अब हर दिन 70-90 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

*163 लॉकर उपलब्ध हैं*

पहले कोरोना से संक्रमित मृतकों की अंत्येष्टि सिर्फ सीएनजी मशीन से हो रही थी। लेकिन अब शवों की ज्यादा संख्या की वजह से लकड़ियों से भी होने लगा है। दरअसल सीएनजी मशीन के जरिए दाह संस्कार के बाद सिर्फ 2 घंटे बाद ही अस्थियां मिल जाती हैं। लकड़ियों से दाह संस्कार होने पर रीति-रिवाजों के मुताबिक लोग अगले दिन या दूसरे दिन अस्थियां लेने आते हैं। सेक्टर 94 ए में स्थित अंतिम निवास का संचालन करने वाली एनजीओ के पदाधिकारियों ने बताया कि यहां अस्थियां रखने के लिए 163 लॉकर उपलब्ध हैं। 

*सभी भरे हुए हैं*

लेकिन इस वक्त सभी भरे हुए हैं। इसके अलावा भी करीब 150 अस्थि कलश बाहर रखे हुए हैं। सबको पहचान का नंबर देते हुए अलग-अलग कमरों में व्यवस्थित तरीके से रखा गया है। इस वक्त अंतिम निवास में 300 से ज्यादा अस्थि कलश पड़े हैं। जिन्हें लेने परिजन नहीं जा रहे हैं। जबकि रोजाना 70-90 शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है।

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