लखनऊ में सड़क पर उतरीं सर्वोदय विद्यालय की छात्राएं, शिक्षकों की कमी पर फूटा गुस्सा

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**दुबग्गा-कानपुर बाईपास पर घंटों धरना, डीएम को मौके पर बुलाने की मांग; बारिश के बीच भी नहीं मानीं छात्राएं**
 
**लखनऊ, 17 अगस्त।** राजधानी लखनऊ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर छात्राओं का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। पारा स्थित **जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय** की करीब 250 छात्राएं सोमवार सुबह विद्यालय से निकलकर दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर पहुंचीं और सड़क पर धरने पर बैठ गईं। बारिश के बीच छात्राओं के प्रदर्शन से व्यस्त मार्ग पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
 
छात्राओं का आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से **शिक्षकों की भारी कमी** बनी हुई है, जिसके कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से बोर्ड कक्षाओं की छात्राएं पाठ्यक्रम पूरा न होने और परीक्षा की तैयारी को लेकर चिंतित हैं। छात्राओं ने विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए और समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की।
 
### डीएम को मौके पर बुलाने पर अड़ीं छात्राएं
 
प्रदर्शनकारी छात्राओं की प्रमुख मांग थी कि **जिलाधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनें** और समाधान का ठोस आश्वासन दें। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्राओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। करीब ढाई घंटे तक डीएम के मौके पर नहीं पहुंचने के बाद छात्राओं ने आगे बढ़ने का निर्णय लिया।
 
रिपोर्टों के मुताबिक, छात्राएं बाद में मुख्यमंत्री आवास की ओर पैदल बढ़ने लगीं। उन्हें रोकने और समझाने के लिए ठाकुरगंज, काकोरी, दुबग्गा और पारा थानों की पुलिस समेत अधिकारी मौके पर पहुंचे।
 
### शिक्षक ही नहीं, भोजन और इलाज को लेकर भी शिकायत
 
छात्राओं ने केवल शिक्षकों की कमी ही नहीं, बल्कि **मेस के भोजन की गुणवत्ता और बीमार होने पर समय से इलाज न मिलने** की शिकायत भी की। उनका कहना है कि इन समस्याओं को लेकर पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
 
यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी विद्यालय के छात्र-छात्राएं कुछ दिन पहले भी शिक्षकों की कमी और विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। 15 अगस्त को भी शिक्षकों की कमी को लेकर विरोध सामने आया था और छात्रों को जल्द शिक्षकों की तैनाती का आश्वासन दिया गया था।
 
### आश्वासन के बाद विद्यालय लौटीं छात्राएं
 
प्रदर्शन के दौरान सड़क पर यातायात बाधित रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। बाद में अधिकारियों के आश्वासन के बाद छात्राएं वापस विद्यालय लौट गईं और विद्यालय परिसर में उनकी समस्याओं को लेकर अधिकारियों ने बातचीत शुरू की।
 
**सवाल सिर्फ सड़क पर उतरी छात्राओं का नहीं, बल्कि उस शिक्षा व्यवस्था का है जहां बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं को अपनी कक्षाओं और शिक्षकों के लिए सड़क पर आवाज उठानी पड़ रही है।** बार-बार सामने आ रही शिकायतें अब प्रशासन के सामने तत्काल और स्थायी समाधान की चुनौती खड़ी कर रही हैं।

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