स्त्री शिक्षा के बिना समाज का उत्थान सम्भव नहीं - डॉ धन्ञजय सिंह

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*कस्तूरबा गांधी ना रहीं होती तो महात्मा गांधी अधूरे होते - डॉ अर्जुन पांडेय 


*महात्मा ज्योतिबाराव फूले - कस्तूरबा गांधी की जयन्ती मनाई गई 


अमेठी। शहर के , ओम् नगर में  जल विरादरी के ओर से महात्मा ज्योतिबा फुले एवं कस्तूरबा गाँधी की जयन्ती मनाई गई ।

 

मुख्य अतिथि  समाजशास्त्री डाॅ  धनन्जय सिंह ने कहा कि ज्योतिराव गोविन्दराव फुले के समावेशी एवं समतामूलक विचार हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है । फुले का कहना था कि सभी प्राणियों में मनुष्य श्रेष्ठ है और सभी मनुष्यों में नारी  श्रेष्ठ है ।उनका मानना था कि स्त्री पुरुष दोनों को सभी अधिकार समान रूप से भोगने का अवसर मिलना चाहिए ।स्त्री शिक्षा के बिना समाज का उत्थान सम्भव नहीं है । फुले ने अपनी पुस्तक गुलामगिरी में तार्किक ढंग से सामाजिक कुरीतियों का खंडन किया । समाज में व्याप्त बुराइयां जैसे छुआछूत ,जाति प्रथा ,बड़े और छोटों के बीच भेदभाव आदि को दूर करना चाहते थे। कस्तूरबा गांधी द्वारा किए गए कार्य भारतीय महिलाओं के लिए दिशा देने का कार्य करेगा। 

 

अमेठी जल विरादरी के संयोजक डॉ अर्जुन पाण्डेय ने कहा कि कस्तूरबा गाँधी ने   देश की सेवा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया ।स्वतंत्रता आन्दोलन में कई बार जेल गई फिर भी अंग्रेजों से नहीं डरी । देश की आजादी के लिए गांधी जी के साथ छाया के रूप में लगी रही। कस्तूरबा यदि न रही होती तो गांधी जी अधूरे होते। परिवार की जिम्मेदारी के साथ ही राष्ट्र को लेकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं रही। महात्मा फुले का दलितों के उद्धार को लेकर किया गया कार्य आने वाली पीढ़ी के लिए के लिए एक माडल होगा।


अधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि कस्तूरबा गांधी ने भारतीय संस्कृति को सशक्त बनाने का कार्य किया। अस्पृश्यता का आजीवन विरोध किया। स्वामी जगन्नाथ आचार्य एवं डॉ राजन अग्रहरि ने भी सम्बोधित किया।

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