अवधी व्यंजन संस्कृति पर 80वीं लोक चौपाल में हुई समृद्ध चर्चा
अन्य खबरे Nov 23, 2025 at 09:30 PM , 188लखनऊ। लोक चौपाल के चौधरी एवं अवधविद् साहित्यकार डॉ. रामबहादुर मिश्र ने कहा कि अवध सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समृद्ध परंपरा है, जिसमें खानपान, संस्कृति और जीवन-मूल्यों की अनूठी छटा बसती है। वे लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा रविवार को इंदिरा नगर स्थित ईश्वर धाम मंदिर परिसर में आयोजित 80वीं लोक चौपाल में “अवध के लोक व्यंजन” विषयक परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि लखनऊ को हाल ही में अपने विशिष्ट खानपान की वजह से क्रिएटिव सिटी का दर्जा मिला है। रेखा अग्रवाल व अन्य वक्ताओं ने अवधी व्यंजनों की प्राचीन परंपरा, त्योहारों व संस्कारों से जुड़े भोजन तथा घरेलू सामग्री से बनने वाले पौष्टिक व्यंजनों की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लोक गायिका एवं चौपाल चौधरी श्रीमती पद्मा गिडवानी ने की। विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ निवेदिता भट्टाचार्य, सौम्या गोयल, अविका, अव्युक्ता, कर्णिका, प्रवीन गौर और दीपिका द्वारा गणेश वंदना व मंगल गीत “गाओ साईंराम आ रहे हैं” से हुआ। इसके बाद “लखनऊ की शान क्या कहना” और “शाकाहारी पकवान क्या कहना” की प्रस्तुति दी गई।
सुषमा गुप्ता ने “क्या बनाऊं तरकारी बता के जाना”, सरिता अग्रवाल ने “आपन रसोई में बनइहो पकवान”, सुषमा प्रकाश ने “हमारे प्रभु कब मिलिहैं घनश्याम”, चित्रा श्रीवास्तव ने “राम पइयां चलो”, अरुणा उपाध्याय ने “राधिका श्यामसुन्दर को प्यारी”, शारदा पाण्डेय ने “आओ आओ मेरे बांके बिहारी”, संगीता खरे ने “झुक जइयो तनी रघुवीर”, वीना सक्सेना ने “सिया जी बनी दुल्हन” तथा पद्मा गिडवानी ने “जटाओं में गंगा गले मुण्डमाला” प्रस्तुत किया। देवेश्वरी पंवार ने गढ़वाली भजन सुनाया।
कार्यक्रम का संचालन ज्योति किरन रतन ने किया तथा वाद्य संगत शशांक शर्मा और अविका गांगुली ने दी। कार्यक्रम में विश्वभर अवस्थी, भूषण अग्रवाल, डॉ. एस.के. गोपाल, रोली अग्रवाल सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।



























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