*सफाई कर्मचारी मस्त, गांव गंदगी से ‌त्रस्त*_

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धौरहरा। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर शासन-प्रशासन पूरा जोर लगाए है। लाखों रुपये गांवों में स्वच्छता के नाम पर खर्च हो रहे हैं। बावजूद इसके मिशन की परिकल्पना साकार होती नहीं दिख रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई कर्मचारियों की तैनाती सिर्फ कागजों तक सीमित है। कर्मचारी गांव जाते ही नहीं। हालात यह हैं कि चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है।_


_रमियांबेहड़ ब्लाक की ग्राम पंचायत टेकीकुंडा के राजस्व गांव में सफाई कर्मचारी की तैनाती है। लेकिन सफाई के नाम पर देखा जाए तो गांवों में जिस तरह से गंदगी के ढेर लगे हैं।_

_उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सफाई कर्मचारी की उपस्थिति कागजों में दर्ज कर ली जाती है। ग्रामीणों की मानें तो सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। सबसे अधिक गंदगी गांव के मुख्य आवागमन सड़कों पर ही है।काफी गंदगी होने के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों को आने जाने में असुविधा होती है।_

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