हिन्दू धार्मिक पुराणों के अनुसार, मां दुर्गा का चौथा भव्य स्वरूप मां कूष्मांडा को माना गया है

जनपत की खबर , 1005

हिन्दू धार्मिक पुराणों के अनुसार, मां दुर्गा का चौथा भव्य स्वरूप मां कूष्मांडा को माना गया है नवरात्रि के चौथे दिन इन्हीं की पूजा का विधान है किंवदंती है कि जब संसार में चारों ओर अंधियारा छाया हुआ था, तब मां कूष्मांडा ने ही अपनी मधुर मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी इसलिए, इन्हें, सृष्टि की आदि स्वरूपा और आदिशक्ति भी कहा जाता है लेकिन किसी भी देवी-देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनका पूजन, पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करना आवश्यक होता है मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा से भक्तों को अजेय रहने का वरदान प्राप्त होता है कौन हैं मां कूष्मांडा?
हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा, नवदुर्गा का चौथा स्वरूप हैं उनकी आठ भुजाएं हैं और उनके सात हाथों में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, कलश, चक्र और गदा विराजमान हैं तथा आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली माला है मान्यताओं के अनुसार, देवी के हाथों में जो अमृत कलश है, वह, उनके भक्तों को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान प्रदान करता है मां, सिंह की सवारी करती हैं, जो धर्म का प्रतीक माना जाता है नवरात्रि के चौथे दिन, मां कूष्मांडा की पूजा के दौरान, उन्हें, दही और हलवे का भोग लगाएं इसके बाद, उन्हें फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें मान्यता है कि ऐसा करने से मां कूष्मांडा जल्द प्रसन्न होती हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं मां कूष्मांडा की महिमा अद्वितीय है अपने सच्चे भक्त को वे कभी भी निराश नहीं करती हैं अगर उनका पूजन पूर्ण निष्ठा एवं विधि-विधान के साथ किया जाए तो वे अपने भक्तों की झोली खुशियों से भर देती हैं।

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