गोला कॉरिडोर की धीमी रफ्तार पर 3.35 करोड़ रुपये की पेनल्टी तय
लखीमपुर खीरी Jan 09, 2026 at 06:52 PM , 110लखीमपुर-खीरी। गोला गोकर्णनाथ स्थित प्राचीन शिव मंदिर को पर्यटन मानचित्र पर चमकाने की योजना पर ठेकेदारों की सुस्ती भारी पड़ गई है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली गोला कॉरिडोर परियोजना में निर्माण कार्य की रफ्तार थमती देख डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जाँच समिति और तकनीकी परीक्षण के बाद तीन ठेकेदारों पर 3.35 करोड़ रुपये से अधिक का लिक्विडेटेड डैमेज लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
स्थलीय निरीक्षण में एसडीएम गोला सहित अन्य अधिकारियों ने पाया कि निर्माण स्थल पर न श्रमिक पर्याप्त हैं, न ही काम में अपेक्षित तेजी। यूपी प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) यूनिट-14, लखनऊ द्वारा कराए जा रहे कार्य की अनुबंधित पूर्णता तिथि 15 मार्च 2026 है, लेकिन मौजूदा हालात में समय पर कॉरिडोर का पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि इतनी अहम परियोजना में देरी के बावजूद समयवृद्धि का प्रस्ताव तक सक्षम प्राधिकारी को नहीं भेजा गया, जिसे प्रशासन ने गंभीर लापरवाही माना हैउल्लेखनीय है कि श्रावण मास के दौरान गोलागोकर्णनाथ शिव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं कांवड़ियों का आगमन होता है। यदि कॉरिडोर निर्माण कार्य श्रावण मास से पूर्व पूर्ण नहीं होता है तो शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न होने की प्रबल संभावना है।
*तकनीकी आख्या में जुर्माने की मुहर*
जाँच समिति की रिपोर्ट में गोला कॉरिडोर निर्माण की भौतिक प्रगति अत्यंत धीमी पाई गई है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार पहले ठेकेदारों पर 10 प्रतिशत तक जुर्माना प्रस्तावित किया गया था। इसके बाद यूपीपीसीएल के परियोजना प्रबंधक द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण का तकनीकी परीक्षण लोक निर्माण विभाग, प्रांतीय खंड से कराया गया। अधिशासी अभियंता की आख्या में अनुबंध संख्या 109 (मेसर्स रीना सिंह) पर 8 प्रतिशत यानी लगभग 1.45 करोड़ रुपये, अनुबंध संख्या 110 (मेसर्स नारायन एसोसिएट्स) पर 6 प्रतिशत यानी लगभग 1.04 करोड़ रुपये तथा अनुबंध संख्या 111 (मेसर्स नारायन एसोसिएट्स) पर 5 प्रतिशत यानी लगभग 86 लाख रुपये का लिक्विडेटेड डैमेज अधिरोपित किया जाना उचित बताया गया।
*भुगतान से पहले कटेगी पेनल्टी*
डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा है कि कार्यदाई संस्था यूपीपीसीएल को भुगतान करते समय 3.35 करोड़ पेनल्टी की राशि काटकर भुगतान किया जाए, ताकि अनुबंध की शर्तों के अनुसार जुर्माना वसूली और परियोजना की समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित हो सके।































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