*लखीमपुर-खीरी जिले कि तिकुनिया में निरंकारी मिसन का विशाल सत्संग कार्यक्रम सम्पन्न हुआ*

लखीमपुर खीरी , 72

तिकुनियां खीरी 
संत निरंकारी मिशन का एक विशाल सत्संग कार्यक्रम शनिवार को नेपाल-भारत सीमा स्थित तिकुनिया बाजार में आयोजित किया गया ।
कार्यक्रम तिकुनिया ग्राम पंचायत कोलोहरी स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में हुआ । सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता संत निरंकारी मंडल अंतर्राष्ट्रीय कार्यालय, दिल्ली के केंद्रीय प्रचारक डॉ. बिनोद सिंह साहेब ने की ।
संत निरंकारी मंडल के प्रचार दौरे के दौरान, निरंकारी मिशन के केंद्रीय प्रचारक डॉ. बिनोद सिंह साहेब, जो भारत के जम्मू और कश्मीर में स्थायी रूप से निवास करते हैं, वह निरंकारी मिसन कि प्रचार हेतु नेपाल-भारत सीमा स्थित तिकुनिया पहुंचे हैं, यह जानकारी निरंकारी सत्संगत भवन तिकुनिया के प्रबंधक नाथुलाल सक्सेना ने दी ।
सक्सेना के अनुसार, मंडल की प्रचार टीम एक विशाल सत्संगत भवन के निर्माण के लिए आवश्यक जांच करने के लिए तिकुनिया आई है ।
चूंकि तिकुनिया क्षेत्र पश्चिमी नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, इसलिए यह कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में नेपाल को भी ध्यान में रखते हुए एक विशाल सत्संगत भवन का निर्माण किया जा सकता है । तिकुनिया में स्थित इस भवन के लिए मिशन से जुडी हुई एक महिला अनुयायी ने भूमि दान की है और वह उसी स्थान पर स्वयं सेवा कर रही हैं । महिला का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से भूमि दान की है । मिशन द्वारा अपनाई जा रही समानता और विश्व बंधुत्व की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र वाली भूमि मिशन को दान कर दी ताकि ईश से निरंकारी मिसन के अनुयायी और यहाँ के आसपास रहने वाले अन्य समाज के लोग मिशन द्वारा किए जा रहे कार्यों से लाभान्वित हो सकें और सभी के बीच प्रेम और बंधुत्व बढ़े । भूमिदान करनेवाली महिला ने कहा कि जब तक उनके शरीर में सास रहेगा, वह मिशन में निस्वार्थ रुप से सेवा करती रहेगी ।
उनकी वाते और सेवाभाव देखकर सत्संगत कार्यक्रम में जमीन दान करने वाली महिला की हर कोई प्रशंसा कर रहा है ।
कार्यक्रम में, भारत के जम्मू और कश्मीर में स्थायी रूप से निवास करने वाले मिसन के प्रचारक माहात्मा डॉ. बिनोद सिंह साहेब ने अपने प्रवचन में कहा, "सत्संग न बड़ी है, न छोटी होती है ! सत्संग केवल सत्संग होता है ! सत्संग समस्त तीर्थयात्राओं की महान तीर्थयात्रा होती है ।" उन्होंने कहा कि निराकार को पाना इतना आसान नहीं है ! इसके लिए गहन आध्यात्मिक साधना आवश्यक है । आध्यात्मिक साधना का अर्थ वन में साधु या संन्यासी बनकर साधना करना नहीं है, बल्कि घर में परिवार के साथ मे रहकर समाज की सेवा करना और गृहस्थ जीवन को सफल बनाना है । गृहस्थ जीवन मे रहकर सही ढंग से सेवा सुमिरन, सतसंगत करने की आध्यात्मिक साधना करने से निराकार का ज्ञान प्राप्त होता है । अपने प्रवचन में प्रचारक साहब जी ने कहा कि यह क्षेत्र नेपाल और भारत कि शिवार्ती क्षेत्र में स्थित हैं, इसलिए उन्होंने तर्क दिया कि यदि यहां एक सुव्यवस्थित सत्संगत भवन का निर्माण किया जा सके, तो नेपाल और भारत के निरंकारियों के लिए बहुत अच्छा कार्य होगा ।
इसी प्रकार, सत्संग कार्यक्रम में भाग लेने पहुचे संत निरंकारी मंडल नेपाल के प्रभारी नर बहादुर रावल ने कहा कि तिकुनिया स्थित निरंकारी भवन के प्रबंधन को सुदृढ़ और सुव्यवस्थित करना आवश्यक है । उन्होंने कहा कि एक बहन जी ने निस्वार्थ भाव से दान मे दिया गया भुमी को आवश्यक कार्यों के लिए सक्रिय करना और क्षेत्र के प्रमुख की जिम्मेदारी किसी को सौंपकर मिशन के कार्यों को आगे बढ़ाना आवश्यक है ।
नैन सिंह वड के संचालन किया हुवा सत्संग कार्यक्रम में बनवारीलाल, रामायणलाल, राजन रेग्मी, चुन्नालाल, इंद्र सिंह, धनंजय, अर्जुन पांडे, श्रीराम काफले, तेज बहादुर बोहरा, नाथूलाल सक्सैना, मीरा, बबली, रामगोपाल, अग्रेज सिंह, भूपेश साहनी, विक्रम पाल, शतीस, रतनलाल, अमरपित सहित के कैयौं निरंकारी अनुयायियों ने भक्ति गीतों और धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किये । कार्यक्रम में नेपाल के भजनी, टीकापुर तथा भारत के बेलराया, निघासन लखीमपुर, मथुरा, तिकुनिया, बिछिया, कौड़ियाला, सिगाही, पलिया आदि क्षेत्रों से निरंकारी अनुयायियों की उल्लेखनीय सहभागीता रही ।

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