नई दिल्ली झंडेवाला में बाबा पीर रतन नाथ मंदिर पर प्रशासनिक कार्रवाई से रोष
लखीमपुर खीरी Dec 09, 2025 at 05:37 PM , 162खीरी में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर संरक्षण की माँग
लखीमपुर खीरी।नई दिल्ली झंडेवाला स्थित पौराणिक मंदिर दरगाह श्री बाबा पीर रतन नाथ जी महाराज (पेशावर वाले) पर 29 नवंबर को भूमि विकास प्राधिकरण और नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद जिले भर में तीव्र आक्रोश फैल गया है। पलिया, लखीमपुर,गोला, खीरी, भीरा और धौरहरा क्षेत्र में रहने वाले हजारों सेवक परिवार इस घटना को धार्मिक विरासत पर हमला मानते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।घटना के विरोध में मंदिर के प्रबंधक मानिक चन्द्र अरोड़ा (मंदिर दरगाह श्री बाबा पीर रतन नाथ जी महाराज — मोहल्ला अहिरान-2, पलिया कलां, जिला लखीमपुर खीरी) की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को विस्तृत ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में माँग की गई है कि मंदिर परिसर की भूमि मंदिर को ही आवंटित की जाए, ध्वस्तीकरण के दौरान लगाई गई लोहे की बैरिकेडिंग हटाई जाए तथा सीमा-बंदी के पुनर्निर्माण की अनुमति दी जाए। समिति ने कहा है कि यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि सनातन धर्म की प्राचीन और प्रमाणिक परंपरा का केंद्र है, जिसकी रक्षा आवश्यक है।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर पर 1948 से कब्जे और 1973 से भूमि भू-पट्टा रिकॉर्ड उपलब्ध है, ऐसे में बिना विधिक आदेश और बिना किसी नोटिस के की गई कार्रवाई न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। समिति ने कहा कि इस तरह का कदम श्रद्धालुओं की भावनाओं के विरुद्ध है और प्रशासन द्वारा निष्पक्षता नहीं बरती गई।मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में मंदिर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता भी दर्ज है। दस्तावेज़ के अनुसार यह स्थल लगभग 1365 वर्ष प्राचीन है और इसे आदि गुरु गोरखनाथ जी के परम शिष्य श्री श्री 1008 बाबा पीर रतन नाथ जी महाराज द्वारा स्थापित किया गया था। वर्तमान में 31वें ईश्वरीय स्वरूप गद्दी पर विराजमान हैं और लाखों श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक धारा को जीवित रखते हुए मानव सेवा, गौ सेवा और धर्म प्रचार के कार्य निरंतर चल रहे हैं।समिति ने यह भी बताया कि प्रतिदिन मंदिर में अमृत बेला की आरती, रामनाम जप, सत्संग, निरंतर लंगर सेवा, गरीबों को भोजन व कंबल वितरण तथा चिकित्सा शिविरों के माध्यम से दवा वितरण किया जाता है। ऐसे में इस धार्मिक सेवा केंद्र को क्षति पहुँचाना भक्त समाज की भावना पर गहरा आघात है।ज्ञापन में प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मंदिर की बाउंड्रीवाल, पुष्प वाटिका, पानी की टंकियाँ, सीवर लाइन, अस्थाई लंगर, प्रसाद हाल, लोहे के मुख्य द्वार और विद्युत कक्ष तक को तोड़ दिया गया, जबकि बार-बार आग्रह करने पर भी अधिकारियों ने आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं कराई और केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर कार्रवाई जारी रखी।ज्ञापन भेजे जाने के बाद अब जिले के साधु-संत समाज, सेवक परिवार और धार्मिक संगठनों में चर्चा तेज हो गई है। पलिया और गोला क्षेत्र में सामूहिक बैठक बुलाने की तैयारी चल रही है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे कानून की मर्यादा में रहते हुए अपनी विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और मुख्यमंत्री से अपेक्षा है कि विश्वभर के सनातन अनुयायियों की आस्था व भावना को ध्यान में रखते हुए मामले का संज्ञान लिया जाएगा और प्राचीन धार्मिक विरासत की सुरक्षा हेतु आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।






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