कई जगह भूमि वाले किसानों को गन्ना आपूर्ति कर्ताओं को नये नियम ने परेशानी में डाला
लखीमपुर खीरी Dec 06, 2025 at 05:25 PM , 162विश्वाकांत त्रिपाठी/हरिशंकर मिश्र
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश जहां एक ओर केंद्र सरकार एक राष्ट्र एक कानून के व्यवस्था को जोर-शोर से लागू कर रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में सरकार द्वारा मोबाइल नेटवर्क में अलग-अलग जोन में पडने वाले टैरिफ शुल्क को समाप्त करके "पूरा देश, एक जोन" व्यवस्था को लागू कर दिया गया एवं एक राशन कार्ड के द्वारा आप देश में कहीं भी किसी भी राशन की दुकान से राशन लेने के लिए सक्षम हो जाएंगे ऐसी व्यवस्था लागू करने की योजना पर सरकार तेजी से काम कर रही है।
जबकि इसके विपरीत प्रदेश के गन्ना आयुक्त सरकार द्वारा एक राष्ट्र एक कानून की अवधारणा को समाप्त करके एक नया तुगलकी आदेश जारी कर दिया है जिसने प्रदेश के गन्ना किसानों को परेशानी में डाल दिया है। इस नई व्यवस्था के अनुसार यदि आपकी भूमि प्रदेश में कई जगहों पर है और आप अलग-अलग गन्ना सोसाइटियों के सदस्य है और विभिन्न चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति करते हैं तो इस कानून के अनुसार आपको एक ही गन्ना समिति के द्वारा एक चीनी मिल में गन्ना आपूर्ति करनी होगी। आपके अन्य गन्ना समितियों के गन्ना आपूर्ति के सट्टे विभाग द्वारा बंद कर दिए जाएंगे।
उन गन्ना आपूर्ति सट्टो को पुनः चालू कराने के लिए एक जटिल कानून की व्यवस्था की गई है।
इसके अनुसार गन्ना आपूर्ति सट्टो को चालू करने के लिए गन्ना समिति के विशेष सचिव को एक प्रार्थना पत्र देना होगा। उसके साथ आपको अपने आधार पत्र की फोटो कॉपी, गन्ना समिति द्वारा जारी किया गया गन्ना आपूर्ति कैलेंडर, और जहां-जहां आपकी भूमि है वहां- वहां की भूमि की खतौनी और साथ में एक शपथ पत्र भी देना होगा। इतने दस्तावेज लगाकर आप यह प्रार्थना पत्र गन्ना समिति के विशेष सचिव को देंगे, जो इस प्रार्थना पत्र को जिला मुख्यालय पर जिला गन्ना अधिकारी को अग्रसारित करेंगे। जिला गन्ना अधिकारी उस प्रार्थना पत्र पर सट्टा चालू करने का आदेश करेंगे। आदेश करने के पश्चात आपके सट्टे चालू होंगे। इन सब कामों में कितना समय व्यतीत हो जाता है इसकी कोई सीमा नहीं है। यह भी कोई निश्चित नहीं इसमें प्रतिदिन आपका कितना नुकसान हो रहा है। इस तुगलकी कानून ने किसानो को तहसील और गन्ना समिति के मध्य भाग दौड़ को बढ़ाकर काफी समस्या में डाल दिया है।
किसानों का कहना है की क्या सरकार इस कानून को रद्द करगी और किसानों के हित में कोई सरल रास्ता निकालेगी असंगठित किसानो के ऊपर ही सारे कानून क्यों थोपे जा रहे हैं? किसान अपनी खेती करें या इन कानून का पालन करने में समय बर्बाद करें।






_page-0001.jpg)
























Comments