देश की सरकारों व सरकारी अफसरों की लालफीताशाही के कारण अन्नदाता उर्वरक खादों के लिए दर की ठोकरें खाने को विवश

लखीमपुर खीरी , 76

धौरहरा खीरी।
दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कृषि का अपना एक अलग योगदान रहा है लेकिन अपने देश की सरकारों व सरकारी अफसरों की लालफीताशाही के कारण अन्नदाता उर्वरक खादों के लिए दर की ठोकरें खाने को विवश है।इस मामले में जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसर तक खामोश है और अन्नदाता बेचारा महंगी दर पर बाजार से बीज व उर्वरक खादे खरीदने को विवश हैं।

जानकारी के मुताबिक देश व प्रदेश की सरकारों के पहले वादो व इरादों में अन्नदाता किसानों को सभी दलों के राजनेताओं व सरकारें अपनी बात बायां करते नहीं थकती। वर्तमान सीजन में अन्नदाता किसानों को खेत के लिए खाद व बीज समय से न मिलना अपने आप में एक घटना बनी।पूरे खरीफ सीज़न में किसानों को समय से उर्वरक खाद के साथ बीज की किल्लतें रही। अन्नदाता को यूरिया खाद के लिए पुलिस की लाठियां तक खानी पड़ी। अन्नदाता को अपनी तैयार फसल को विचौलियो के हाथों औने-पौने दामों पर बेचना पड़ा और सरकार द्वारा जारी खरीद केंद्र सिर्फ शो पीस नजर आए। जबकि वर्तमान समय में रवी फसलों में मुख्य रूप से गेहूं की फसलें अन्नदाता किसानों ने बोई जाती है मज़े की बात यह है कि पहली सिंचाई के बाद अन्नदाता को यूरिया खाद का छिड़काव करना आवश्यक है मगर ज़िले से लेकर क्षेत्र की सहकारी समितियों में यूरिया खाद नदारत होने के चलते गेहूं उत्पादन में कमी होने का एहसास जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकारी अफसरों को अंदाजा नहीं है।कुल मिलाकर अन्नदाता किसान यूरिया खाद के लिए निजी दुकानों से महंगी दर में बाजार से खरीदने को मजबूर हैं। किसान के लिए अफसरों से लेकर राजनैतिक लोग अपनी धुन में मस्त।

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