नारी राष्ट्र की ऊर्जा का स्रोत: डॉ.पारुल त्रिवेदी
लखीमपुर खीरी Nov 18, 2025 at 05:35 PM , 125लखीमपुर खीरी। विद्या भारती विद्यालय पं. दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज, उदयपुर, गोला रोड में आज, सोमवार, 18 नवम्बर 2025 को आयोजित 'सप्तशक्ति संगम' कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस गरिमामय समारोह में वक्ताओं ने नारी शक्ति के प्रकटीकरण और भारत के विकास में महिलाओं के अमूल्य योगदान पर सारगर्भित विचार रखे। कार्यक्रम का आयोजन 'मातृ देवो भव' की संकल्पना को सुदृढ़ करने और उन प्रेरणादायी महिलाओं के योगदान को स्मरण करने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम का केंद्रीय सूत्र था: "कीर्ति: श्री वाक् च नारीणां स्मृति धृतिः क्षमा।" समारोह की अध्यक्षता कर रहीं प्रतिष्ठित समाज सेविका श्रीमती सीमा अग्रवाल ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा, "नारी केवल परिवार की धुरी नहीं है, वह समाज और राष्ट्र की ऊर्जा का स्रोत है। उनका त्याग, समर्पण और निःस्वार्थ भाव किसी भी राष्ट्र की नींव को मजबूत करता है। हमें अपनी माताओं और बहनों के गुणों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।" मुख्य वक्ताओं ने अपने विचारों से नारी शक्ति की बहुआयामी भूमिका को रेखांकित किया। श्रीमती रजनी कपूर ने 'सप्तशक्ति संगम' के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "नारी शक्ति, केवल भावनात्मक नहीं है, वह कर्मठता, नेतृत्व और ज्ञान का प्रत्यक्ष रूप है। शिक्षा, विज्ञान, या समाज सेवा—कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जहाँ नारी ने अपनी छाप न छोड़ी हो। भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प में नारी शक्ति का योगदान अपरिहार्य है।" "नारी शक्ति, केवल भावनात्मक नहीं है, वह कर्मठता, नेतृत्व और ज्ञान का प्रत्यक्ष रूप है। शिक्षा, विज्ञान, या समाज सेवा—कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जहाँ नारी ने अपनी छाप न छोड़ी हो। भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प में नारी शक्ति का योगदान अपरिहार्य है।" डॉ. पारुल त्रिवेदी (विभाग प्रमुख, राष्ट्रीय सेविका समिति) ने परिवार और समाज पर नारी के प्रभाव पर जोर देते हुए कहा, "एक राष्ट्र तभी शक्तिशाली बनता है, जब उसकी माताएं और बहनें संस्कारित, शिक्षित और सशक्त होती हैं। वे बच्चों में राष्ट्र प्रेम और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करती हैं, जो आगे चलकर राष्ट्र का चरित्र बनाते हैं। 'मातृ देवो भव' की संकल्पना को हमें केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से अपनाने की आवश्यकता है।" "एक राष्ट्र तभी शक्तिशाली बनता है, जब उसकी माताएं और बहनें संस्कारित, शिक्षित और सशक्त होती हैं। वे बच्चों में राष्ट्र प्रेम और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करती हैं, जो आगे चलकर राष्ट्र का चरित्र बनाते हैं। 'मातृ देवो भव' की संकल्पना को हमें केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से अपनाने की आवश्यकता है।" कार्यक्रम का एक भावनात्मक क्षण तब आया जब विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विशिष्ट माताओं डॉ.कृतिका बाजपेयी ,श्रीमती विनीता गुप्ता ,श्रीमती करुना पाण्डेय ,श्रीमती निशा ठाकुर ,श्रीमती सुनीता मिश्रा को सम्मानित किया गया। उनके जीवन की संघर्ष और सफलता की गाथाओं ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया ।कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती ऋतु अवस्थी (जिला संयोजिका) ने कार्यक्रम के प्रारम्भ में कार्यक्रम की प्रस्ताविकी रखी व अंत में संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन करवाया | इसके अतिरिक्त, प्रेरणादायी महिलाओं के सन्देशों का प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम संचालिका श्रीमती सोनिका धवन ने अपनी कुशल और ओजस्वी मंच प्रस्तुति से कार्यक्रम में निरंतर उत्साह बनाए रखा। विद्यालय की आचार्या श्रीमती आक्षा शुक्ला ने सभी विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, कार्यक्रम संचालक और उपस्थित जनसमूह का हृदय से आभार व्यक्त किया और विश्वास जताया कि 'सप्तशक्ति संगम' से प्राप्त प्रेरणा समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगी|






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