सीएचसी अधीक्षक ने कटवाए बेशकीमती गूलर के पेड़ डीएम की संज्ञान में आने के बाद शुरू हुई जांच
लखीमपुर खीरी Oct 29, 2025 at 06:35 PM , 266(मनोज मिश्र)
धौरहरा खीरी। धौरहरा वन रेंज के अंतर्गत कस्बा खमरिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी संपत्ति की अवैध बिक्री का मामला बीते रविवार 26.10.2025 को उजागर हुआ था।
जानकारी के अनुसार सीएचसी परिसर में लगे लाखों रुपये की कीमत के गूलर के पेड़ों को ठेकेदार द्वारा कटवाया जा रहा था,जबकि इस कार्य के लिए किसी भी सक्षम स्तर से अनुमति नहीं ली गई थी। जबकि
सूत्रों के मुताबिक मूसेपुर निवासी ठेकेदार शरीफ व पहाड़ी के द्वारा यह कटान कराया जा रहा था। ठेकेदार से जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि सीएचसी अधीक्षक द्वारा ही इन पेड़ों को उन्हें बिक्री किया गया था। बिना परमिट के इन दोनों ठेकेदारों के माध्यम से पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही थी। बताया जा रहा है कि सरकारी पेड़ों की बिक्री से प्राप्त धनराशि को सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय निजी जेब में डालने का पूरा खेल दीपावली त्यौहार को देखते हुए रचा गया था।
ग्रामीणों द्वारा विरोध व उच्चाधिकारियों को सूचना देने के बाद मामला तूल पकड़ता गया।धौरहरा तहसील,रेंज,थाना पुलिस तीनों स्तरों पर सूचना दिए जाने के बावजूद प्रारंभिक दौर में किसी ने संज्ञान नहीं लिया। अंततोगत्वा प्रकरण जिलाधिकारी खीरी दुर्गा शक्ति नागपाल के संज्ञान में आने के बाद संबंधित अधिकारियो ने थोड़ा हरकत में आए।
प्रकरण में वन विभाग की टीम में शामिल डिप्टी रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड मौके पर पहुंचकर व ट्रैक्टर-पटियाला सहित लकड़ी को कब्जे में लेकर खमरिया पुलिस को सुपुर्द किया। कुछ लकड़ी अब भी मौके पर पड़ी हुई है, जबकि ठेकेदार और मजदूर उपकरण सहित फरार हो गए थे।
इस संबंध में जानकारी ली गई तो सीएचसी अधीक्षक ने सफाई देते हुए कहा था कि लकड़ी को केवल किनारे करवाया जा रहा था और बाद में सूचना दी जानी थी।वहीं, उपजिलाधिकारी धौरहरा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद ठेकेदार और विक्रय में शामिल लोग सक्रिय हो गए हैं और मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं।ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए,ताकि सरकारी संपत्ति की लूट पर रोक लग सके।
वर्तमान में ट्रैक्टर (पावर ट्रक 434) और लकड़ी से लदा पटियाला वन विभाग द्वारा थाना पुलिस के सुपुर्द किया गया था लेकिन चार दिन बाद भी अधिकारी प्रकरण की तह तक नहीं पहुंच पाए।






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