धर्म को अपवित्र करने वालों का सर्वनाश हो जाएगा
लखीमपुर खीरी Oct 28, 2025 at 06:02 PM , 116सनातन को बचाने के लिए क्रांति लानी होगी
आडंबर करने वाले संत धर्म के पतन का कारण
बरवर खीरी :- जंगबहादुरगंज के राघवेंद्र कल्याण मंडप में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन शैवाचार्य प्रशांत प्रभु महाराज ने कहा कि जैसा अन्न खाते है वैसा मन बन जाता है। यही मन मानव के आचरण का कारण बनता है। मनुष्य को अपने कर्मों के हिसाब से जब तक भोग भोगना है, तब तक उसे जीना ही पड़ेगा। आचरण में आए परिवर्तन के चलते ही मनुष्य बिना आत्मा के ही जी रहा है । ऐसे मानव आत्महीन,अज्ञानी व अविवेकीय है। अगर आपके ह्रदय में शिवत्व है, दया है तो शरीर चलता रहेगा और शिव की कृपा प्राप्त होती रहेगी। यदि मानव शिवालय में जाकर अपने पापों की क्षमा याचना करता है, तो पश्चयाताप के कारण वह समस्त पापों को मुक्त हो सकता है। सनातन को बचाने व धर्म के लिए हम सभी को पीड़ित परिवार की मदद करनी ही चाहिए। सनातन का साथ देना चाहिए। उन्होंने व्यासपीठ से बहराइच कांड में पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की । सनातनी को एकजुट होना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य अंधकार मय हो जाएगा। हमें जातियों में न बंटकर हमको अपना परिचय सनातन बताना चाहिए। हिन्दू शास्त्र नहीं पड़ेगा, ज्ञान को महत्व नहीं देगा तो उसका शोषण देगा। जिसको अपने गुरु व माता- पिता से दुर्गंध आने लगे तो समझ लो उसे अभी ज्ञान नहीं हुआ है। गणेश प्रतिमा के बारे में बताते हुए कहा कि तालाब की मिट्टी, गोबर, गंगाजल के मिश्रण से गणेश बनाओ। प्लास्टर आफ पेरिस मूर्ति की पूजा न करें। धर्म को बचाने के लिए धर्मगुरुओं को क्रांति लानी होगी। धर्म को अपवित्र करने वालों का सर्वनाश हो जाएगा। महाराज ने शिव महिमा के बारे में बताया कि शिव की भक्ति करने से विधि का विधान भी बदल जाता । शिव ज्योति रूप में है । शिवलिंग को इसलिए ज्योतिर्लिंग कहकर पूजते है । शिव परम् ज्योति स्वरूप ही ईश्वर है । शिव कथा सुनने से शिव पूजन का लाभ प्राप्त होता है । सूत जी महाराज ने कहा हे ऋषियों उन परमपूज्य नारायण के जीवन में जो कृपा प्राप्त हुई वह शिव की कृपा से है । उन्हें संसार के पालन करने का गौरव प्राप्त हुआ । मैं भगवान शिव और उनके भक्तों के विषय में कहां तक बताऊं । एक बार काशी में केदार मंदिर के ज्योतिर्लिंग पर बैठे हुए राजा चंद्रभान तपस्या कर रहे थे । भगवान शिव की भक्ति करते हुए काशी केदारखड भष्म और कुमकुम लेपित करते हुए उनकी पूजा करने लगे । कणाद ऋषि ने कहा ने कहा कि हे राजा चंद्रभान आपकी इच्छा हो तो आप हमारे साथ हिमालय की तलहटी में बसे हुए केदार सर भगवान के दर्शन करने चलो । वहां पर भगवान शिव के नंद केश्वर महाराज स्थापित है । इस संसार मैं भगवान शिव ने जो सबसे ज्यादा कृपा की वह अपने वाहन नंद केश्वर महाराज पर की है । राजा चन्द्रभान की पत्नी ने कहा कि आप जाइए मैं आपके ना रहते हुए राज्य का संचालन करूंगी । धर्म का निर्वाहन करूंगी आपकी प्रजा की सेवा करूंगी । काशी में मौजूद पवित्र पावन केदार शिव लिंग का पूजन करूंगी । भगवान कहते हैं कहते हैं किसी को भोजन कराने से जितना शिव प्रसन्न होते हैं उतना कोई दूसरा पसंद नहीं होता है । कभी किसी के भोजन की निंदा मत करना ।






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