दुधवा की लाइफ लाइन सुहेली का प्रवाह साइफन से कराने को प्रधानों ने मुख्यमंत्री कोभेजा ज्ञापन

लखीमपुर खीरी , 258

राजीव दीक्षित/विश्वकान्त त्रिपाठी


                    " तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नदी घाटी विकास परियोजना के तहत नेपाल से निकलने वाली सुहेली नदी परियोजना के नाम से 1972 निघासन तहसील क्षेत्र के बौधिया ग्राम सभा के उत्तर जंगल के बीच सुहेली नदी के पानी को बांध बना इकट्ठा कर नहर निकाली गई थी, सरकार की यह योजना पूरी तरह से असफल और निष्प्रभावी रही। इससे न तो कभी सिंचाई के लिए नहर में पानी पहुंचा और न ही अन्य उद्देश्यों की पूर्ति हो सकी हां इतना जरूर उत्तर में खैरीगढ़ पूर्व में धर्मापुर तथा पश्चिम में सिनेमा बाद और मझगई रेंज के जंगल और आबादी क्षेत्र में दलदल आवश्य हो गया, और बरसात के दिनों दुधवा रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में पूरी तरह पानी भरने लगा, जिससे तमाम वनस्पतियां नष्ट होने के साथ ही जीव जंतुओं के भोजन की समस्या भी उत्पन्न हुई है।        1972 से लगातार क्षेत्रीय जनता सुहेली परियोजन  बैराज का विरोध करती चली आ रही है,  इस बाबत कई रिट भी लखनऊ में की गई लेकिन मामला ढाक के तीन पात ही रहा। इससे आज भी दुधवा फॉरेस्ट क्षेत्र में जल भराव के कारण बरसात के दिनों में जीव जंतु भोजन की तलाश में जंगल से बाहर निकलकर हिंसक हो रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पाद मचा रहे हैं जिससे जनमानस पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और कृष्ण भूमि पूरी तरह प्रभावित है जिसके चार जिसके कारण बैराज के पीछे हमेशा बाढ़ की स्थिति बनी रहती है वनस्पतियां और जीव जंतु प्रभावितहुए है"

 

 

 

 

 

 

 

विश्वकान्त  त्रिपाठी 

लखीमपुर खीरी।दुधवा नेशनल पार्क की लाइफ लाइन सुहेली नदी पर सुहेली साइफन की अपस्ट्रीम व डाउन स्ट्रीम से अतिक्रमण खाली करा नदी का प्रवाह साइफन से प्रवाहित कराने के सम्बन्ध में निघासन तथा धौरहरा तहसील के ग्राम प्रधानों ने भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है पलिया आंशिक सहित निघासन तथा धौरहरा तहसील के एक दर्जन से अधिक ग्राम सभाएं सहेली नदी के जल भराव तथा दलदल से पूरी तरह आच्छादित हैं ग्रामवासियों व दुधवा नेशनल पार्क की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सुहेली नदी की भूमि से अतिक्रमण हटाते हुए सहेली नदी के फाटक पूरी तरह खोले जाएं जिससे दुधवा वन क्षेत्र के वन्य जीव सहित वनस्पतियों की रक्षा के साथ-साथ कृषि भूमि को बचाया जा सके (सुहेली साइफन की अप स्ट्रीम व डाउन स्ट्रीम से हटवा कर ) सुहेली साइफन से सुहेली नदी के पानी का प्रवाह घाघरा नदी में निकलवाने की व्यव्स् की जाए। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में ग्राम प्रधान गण ग्राम खैरटिया, दलराजपुर, मुर्तिहा सिन्हौना, सहनखेडा, रमुआपुर, अयोध्यापुरवा, बेनीपुरवा, बसंतापुर, पोखरी, निबौरिया, जसनगर आदि गांवों के निर्वाचित प्रधान हैं।

       सुहेली नदी नेपाल की तराई से निकाल कर दुधवा के जंगल में प्रवेश करते हुए निघासन तहसील क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक ग्राम सभाओं के लोग सहेली नदी के जल प्रभाव से प्रभावित होते हैं तथा उनकी कृषि भूमि जल पलवित रहती है जिससे खेती किसानी पर व्यापक प्रभाव पड़ता है सुहेली नदी के कारण बरसात के दिनों मे दुधवा नेशनल पार्क की वन सम्पदा जीव-जन्तुओं तथा हम ग्रामवासियों की एक गम्भीर समस्या प्रत्येक वर्षाकाल में आ रही भीषण बाढ को लेकर है। इस समस्या का मुख्य कारण हमारे क्षेत्र में घाघरा बैराज से शारदा बैराज को जाने वाली नहर (शारदा सहायक सिंचाई परियोजना) पर पड़ने वाले सुहेली नदी के प्रवाह को घाघरा में निकालने हेतु बनाये गये 24 बैरल के सुहेली साइफन जो शारदा सहायक नहर पर बना है तक पानी प्रवाहित नहीं होता है। मेंजौरहा नाला व कई अन्य छोटे नदी-नालों का पानी सोती साइफन (12 बैरल) से निकलता है उसी में सुहेली नदी का पानी डायवर्ट सुहेली साइफन बनते समय 1974 में किया गया था ।उसके बाद से सुहेली साइफन (24 बैरल) से सुहेली नदी के पानी का निकास नहीं हो सका है।

" तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नदी घाटी विकास परियोजना के तहत नेपाल से निकलने वाली सुहेली नदी परियोजना के नाम से 1972 निघासन तहसील क्षेत्र के बौधिया ग्राम सभा के उत्तर जंगल के बीच सुहेली नदी के पानी को बांध बना इकट्ठा कर नहर निकाली गई थी, सरकार की यह योजना पूरी तरह से असफल और निष्प्रभावी रही। इससे न तो कभी सिंचाई के लिए नहर में पानी पहुंचा और न ही अन्य उद्देश्यों की पूर्ति हो सकी हां इतना जरूर उत्तर में खैरीगढ़ पूर्व में धर्मापुर तथा पश्चिम में सिनेमा बाद और मझगई रेंज के जंगल और आबादी क्षेत्र में दलदल आवश्य हो गया, और बरसात के दिनों दुधवा रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में पूरी तरह पानी भरने लगा, जिससे तमाम वनस्पतियां नष्ट होने के साथ ही जीव जंतुओं के भोजन की समस्या भी उत्पन्न हुई है।        1972 से लगातार क्षेत्रीय जनता सुहेली परियोजन  बैराज का विरोध करती चली आ रही है,  इस बाबत कई रिट भी लखनऊ में की गई लेकिन मामला ढाक के तीन पात ही रहा। इससे आज भी दुधवा फॉरेस्ट क्षेत्र में जल भराव के कारण बरसात के दिनों में जीव जंतु भोजन की तलाश में जंगल से बाहर निकलकर हिंसक हो रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पाद मचा रहे हैं जिससे जनमानस पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और कृष्ण भूमि पूरी तरह प्रभावित है जिसके चार जिसके कारण बैराज के पीछे हमेशा बाढ़ की स्थिति बनी रहती है वनस्पतियां और जीव जंतु प्रभावितहुए है"
 आवश्यकता है दुधवा नेशनल पार्क तथा उपर्युक्त ग्रामों को बाढ़ से बचाने हेतु सुहेली नदी की भूमि से लठौआ घाट से आगे अतिक्रमण हटाकर पानी के प्रवाह को सुहेली साइफन तक प्रवाहित किया जाये ।जिससे उपरोक्त सभी ग्रामों की कई हजार एकड़ धान व गन्ने की फसलें व दुधवा पार्क को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही सडके टूटकर खराब हो जाती हैं व कई महीने बच्चों की पढ़ाई अवरूद्ध रहती है जान-माल के नुकसान से भी राहत मिलेगी। सरकार द्वारा सुहेली नदी सुहेली बैराज की अपस्ट्रीम में केवल डिसिल्टिंग कराकर बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। जब तक कि सुहेली बैराज, सुहेली साइफन से पानी का उचित प्रवाह सही प्रकार से खोल न दिया जाय।अतः श्रीमान से प्रार्थना है कि हम सब ग्रामवासियों व दुधवा नेशनल पार्क की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सुहेली नदी की भूमि से अतिक्रमण(सुहेली साइफन की अप स्ट्रीम व डाउन स्ट्रीम से हटवा कर ) सुहेली साइफन से सुहेली नदी के पानी का प्रवाह घाघरा नदी में निकलवाने की कृपा की जाए। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में ग्राम प्रधानोंमें एक दर्जन से अधिक ग्राम प्रधान हैं। साइफन से पानी न निकलने के कारण इसका विरोध ग्रामीण धरना प्रदर्शन करके कर चुके हैं।

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