अनुराग की आत्मनिर्भरता का आधार बना मशरूम उत्पादन 50-60 हजार प्रतिमाह की आय का जरिया बनी मशरूम खेती
लखीमपुर खीरी May 25, 2022 at 09:59 PM , 148लखीमपुर खीरी 25 मई। कृषि प्रधान जिले खीरी में किसानों की आय दोगुनी करने में अब मशरूम की खेती मददगार साबित हो रही है। तहसील सदर व ब्लाक फूलबेहड़ के गांव ओदरहना के अनुराग अग्रवाल ने अफसरों की प्रेरणा से मशरूम की खेती शुरू की। इसे बेचने के लिए इन्हें किसी बाजार अथवा बिचौलिए की भी आवश्यकता नहीं है।
खीरी के अनुराग अग्रवाल जो कंप्यूटर साइंस से बीटेक हैं।कोरोना की त्रासदी में लॉकडाउन में कुछ कर गुजरने की चाहत मन में संजोए अनुराग कृषि विभाग के अफसरों के संपर्क में आए। वर्ष 2020 के सितंबर माह में उन्होंने 1500 स्क्वायर फीट में एक लाख की लागत से सीजनल मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। वह बताते हैं कि इसमें उन्हें अफसरों ने काफी सहयोग मिला। नतीजा यह रहा कि वह फरवरी 2021 तक मशरूम की खेती से 20 से 25 हजार की आय अर्जित की। फिर उन्होंने इस व्यवसाय को बड़े स्तर पर करने का विचार किया। अफसरों की सकारात्मक राय व सीजनल काम में हुए लाभ ने अनुराग को आगे कदम बढ़ाने पर हौसला दिया। अनुराग ने पांच हजार वर्ग फिट कारपेट एरिया में 50 लाख की लागत से वर्षभर मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। अनुराग के मुताबिक आज वह प्रतिमाह 45 कुंटल मशरूम का उत्पादन करके 4.5 से 5 लाख तक की बिक्री कर रहे है। वह इस रोजगार के जरिए 50 से 60 हजार प्रति माह की आय अर्जित कर रहे। अफसरों ने उनसे संपर्क करके मशरूम उत्पादन के प्रोत्साहन के लिए सरकार की योजना के जरिए 08 लाख का अनुदान दिलाने काम भी प्रगति पर है। अनुराग के इस मशरूम उत्पादन के जरिए छोटे-छोटे सब्जी दुकानदारों को भी मशरूम बेचकर अच्छा मुनाफा मिल रहा है।
*कम लागत अधिक मुनाफा*
अनुराग बताते हैं कि भूसे और प्रोटीन मिश्रण से तैयार कर उत्तराखंड के देहरादून से मशरूम का बीज मंगाकर बिजाई की जाती है। उन्होंने ओदरहना गांव में मशरूम उत्पादन के चार कमरे तैयार किए। जिसमें प्रति कमरे 2400 बैग की दर से कुल 9600 बैग के जरिए मशरूम उत्पादन का काम कर रहे हैं।
*राष्ट्रीय कृषि विकास योजना : अनुराग को इकाई लागत का 40 फ़ीसदी मिलेगा अनुदान : डीएचओ*
जिला उद्यान अधिकारी दिग्विजय कुमार भार्गव ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्रोजेक्ट बेस कार्यक्रम में उद्यमी अनुराग अग्रवाल के मशरूम उत्पादन को शामिल किया गया है, जिसकी डीपीआर प्रस्ताव शासन में स्वीकृति हेतु भेज दी गई है। निर्धारित इकाई लागत का 40 फ़ीसदी अनुमन्य अनुदान प्रदान किया जाएगा।
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