धड़ल्ले से बिक रहे कटरूआ-धरती का फूल

लखीमपुर खीरी , 209

पलियाकला-खीरी।  हम बात करते है विश्व प्रसिद्ध दुधवा नेशनल पार्क की जहां देश विदेश से प्रतिवर्ष हजारों की तादाद में सैलानी आकर जंगल के अनुपम सौंदर्य व प्राकृतिक छटा को अपने कैमरे में कैद कर भारत की सुंदरता का बखान करते है। मगर पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि वन विभाग में कुछ लोग ऐसे भी है जो इस प्राकृतिक वन संपदा का विनाश कर अपना विकास कर रहे है। जानकारी के मुताबिक दुधवा टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा भारत नेपाल सीमा के करीब है जिसका पूरा फायदा उठाकर दोनों देशों के कुख्यात तस्कर कुछ ऐसे देशद्रोहियों की मिलीभगत से जंगल की प्राकृतिक वन संपदा को नुकसान पहुचा रहे हैं जिन्हें सरकार ने जंगलों की सुरक्षा के लिए रखा है। सूत्रों से जानकारी के अनुसार नेपाल सीमा क्षेत्र से लगे दुधवा के भीतरी जंगलों से वेशकीमती पेड़ो को काटकर खोखला किया जा रहा है जिसके चलते वन्य जीवों की शरणस्थली अब खत्म होती जा रही है और वह हिंसक हो रहे हैं जिसका खामियाजा मानवीय जीवन को भुगतना पड़ रहा है। अगर बात करें तो पिछले कुछ वर्षों में एक दर्जन से अधिक लोग वन्यजीवों का शिकार होकर काल के गाल में समा चुके हैं। मगर अधिकारी कुम्भकर्णी नींद से जागने का नाम ही नही ले रहे है। जहां एक ओर विभागीय अधिकारी जंगल की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं वही वन क्षेत्र से लगे पलिया कस्वे के प्रमुख मेला सिंह चैराहे पर बड़ी मात्रा में बिक रहे कतरूए से ही साफ पता चलता है कि सुरक्षा व्यवस्था कितनी पोल खुल रही हैं। जिसकी लगातार सूचना प्राप्त होने के बाद भी वन विभाग के द्वारा कार्यवाही न करना भी मिलीभगत की ओर इंगित करता है।

 

Related Articles

Comments

Back to Top