30-मई हिंदी पत्रिकारिता दिवस
लखीमपुर खीरी May 31, 2021 at 10:51 PM , 104लखीमपुर-खीरी। 30 मई का दिन आपको यह याद दिलाने के लिए हर वर्ष आता है कि लोकतंत्र का चैथा स्तम्भ पत्रकारिता के बड़े तकाजे,उम्मीदें आपसे हैं।सरल भाषा मे पत्रकारिता को अगर परिभाषित किया जाए तोष्सरकार,सिस्टम और जनता के बीच आम जनता की जरूरतों और सूचनाओं के आदान-प्रदान को पत्रकारिता कहते हैंष्।इसका झुकाव सदा---गरीब, पिछडे,शोषित,पीड़ित समाज की तरफ होना चाहिए।क्यूंकि पत्रकार और पत्रकारिता ही---उनकी आवाज है और सरकार को सचेत करती है।आजादी से पहले अंग्रेजों और उनके जुल्मों-सितम के विरुद्ध इस देश मे हजारो पत्रकारों ने फांसी के फंदे को हक और सच के लिए कबूल किया।उस समय यह देश सेवा थी और कलम और सियाही के शब्दों का मेल देश भक्ति और जुनून से कम नही था। मगर अफसोस धीरे-धीरे आजादी के बाद यह ना सिर्फ साम्प्रदायिक बल्कि सत्ता में बैठी बेईमान सरकारों की मुंह की बोली३






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