*तिकुनियाँ देवी मंदिर मेले की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, 26 अक्टूबर को होगा भूमि पूजन*

लखीमपुर खीरी , 0

तिकुनियाँ खीरी
 क्षेत्र की धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक तिकुनियाँ देवी मंदिर का वार्षिक मेला इस बार भी श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा। मेले को भव्य रूप देने के उद्देश्य से मेला कमेटी ने तैयारियाँ तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मेला कमेटी अध्यक्ष डॉ. दिनेश गुप्ता के सानिध्य में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें मेले की व्यवस्थाओं, कार्यक्रमों और सुरक्षा संबंधी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि 26 अक्टूबर को विधि-विधान के साथ भूमि पूजन किया जाएगा।
बैठक में मेले को व्यवस्थित, आकर्षक और सफल बनाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श हुआ। देवी मंदिर में प्रतिवर्ष लगने वाले इस मेले से क्षेत्र के लोगों की धार्मिक भावनाएँ जुड़ी हुई हैं। मेले में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और मेलार्थियों के पहुँचने की संभावना रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोजन की तैयारियों को समय से पूरा करने पर जोर दिया गया।
कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे मुख्य आकर्षण
मेले को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे सांस्कृतिक रंग देने की भी तैयारी है। आयोजन के दौरान कवि सम्मेलन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्य, कला और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही क्षेत्रवासियों को मनोरंजन का अवसर मिलेगा। मेले में आने वाले लोगों के लिए बेहतर व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की गई।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन से रहेगा समन्वय
मेले में उमड़ने वाली संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए पुलिस प्रशासन के सहयोग और समन्वय से पुख्ता इंतजाम किए जाने की योजना है, ताकि श्रद्धालु एवं दर्शक शांतिपूर्ण वातावरण में मेले का आनंद ले सकें। आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में मेला कमेटी अध्यक्ष डॉ. दिनेश गुप्ता के साथ वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुज गुप्ता, उपाध्यक्ष कृष्णा सिंह उर्फ बब्बू भैया तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने मेले को सफल बनाने के लिए आपसी सहयोग, समन्वय और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने पर बल दिया।
26 अक्टूबर को होने वाले भूमि पूजन के साथ ही मेले की तैयारियों को नई गति मिलेगी। धार्मिक आस्था, साहित्य और संस्कृति के संगम के रूप में आयोजित होने वाले इस मेले को लेकर क्षेत्रवासियों में उत्सुकता बनी हुई है।

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