नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की, श्रीमद् भागवत कथा में सुनाया प्रहलाद और हिरणकश्यप का प्रसंग, उत्सव की भांति मनाया कृष्ण जन्मोत्सव

लखीमपुर खीरी , 8

गोला गोकर्णनाथ खीरी,
लक्ष्मी नगर कॉलोनी निवासी छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विजय वाजपेई के आवास पर हो रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को कथा व्यास ने भक्त प्रहलाद और हिर्नाकश्यप के अंत का प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान श्री कृष्ण जन्मोत्सव उत्सव के भांति मनाया गया। नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। 

श्री नैमिष धाम के स्वामी नारदानंद आश्रम के आचार्य गोविंद मिश्रा ने श्रीमद् भागवत कथा में सुनाया कि व्यक्ति को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। भक्त प्रहलाद की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर श्री हरि नारायण ने अहंकार में मदमस्त हिर्नाकश्यप का अंत किया। उन्होंने सुनाया जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा।

धूमधाम से मनाया कृष्ण जन्मोत्सव,

श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर देर शाम आचार्य ने नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजन सुनाया तो सभी श्रद्धालु खड़े होकर झूमने, नाचने लगे। श्री कृष्ण जन्मोत्सव उत्सव की तरह मनाया गया। एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाईयां दी गई। खिलौने और मिठाईयां बाटी गई। कथा महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भजन गाकर भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशियां मनाई।
मुख्य यजमान विजय वाजपेई, नीलम बाजपेई, अभय वाजपेई, शिवांगी, आनंद त्रिवेदी, महेंद्र गिरी, पंकज पुरवार, राजकुमार मिश्रा, लालू मिश्रा, डॉ पीयूष शुक्ला, सुबोध दीक्षित उर्फ प्रधान, आदेश कुमार दीक्षित, आरती सिंह भदोरिया, प्रियंका दीक्षित, निरंजना मिश्रा, शिल्पी, मनोरमा देवी, प्रियम मिश्रा, शेखर श्रीवास्तव आदि भागवत कथा प्रेमी, मोहल्ला निवासी मौजूद रहे।

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