थाना फूलबेहड़ क्षेत्र में दबंगों ने मां-बेटे को धारदार हथियार से पीटा,

लखीमपुर खीरी , 0

रिपोर्ट लिखने के बजाय चौकी के सिपाहियों ने पीड़ित को ही डाला हवालात में 

लखीमपुर-खीरी। जनपद के थाना फूलबेहड़ क्षेत्र के ग्राम मोजमाबाद में कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आरोप है कि दबंग पड़ोसियों ने वृद्ध मां और बेटे पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय पीड़ित को ही रात में उठाकर हवालात में बंद कर दिया और झूठा केस बनाकर कोर्ट में पेश कर दिया।
पीड़ित राजकिशोर जायसवाल पुत्र रामाधार, निवासी ग्राम मौजमाबाद ने अधिकारियों को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि 2 अक्टूबर को दिन में करीब 11 बजे उसके पड़ोसी नितिन पुत्र सिद्धू वर्मा उसके भतीजे अनुज कुमार के साथ गाली-गलौज कर रहा था। मना करने पर विपक्षी नितिन, शनि पुत्र गण सिद्धू वर्मा,सिद्धू वर्मा पुत्र मुन्ना,सुमन पत्नी सिद्धू वर्मा, पीड़ित राजकिशोर को भी गालियां देने लगे।
बातों ही बातों में विपक्षियों ने धारदार हथियार से हमला कर मारपीट शुरू कर दी, जिसमें राजकिशोर और उसकी मां रामदेवी को गंभीर चोटें आईं।शोर सुनकर पड़ोसी इकट्ठा हुए तो आरोपी ऐलानिया धमकी देते हुए बोले मैं तुम्हारे परिवार को नष्ट-नाबूद कर दूंगा।
घायल मां-बेटे को इलाज के लिए सीएचसी फूलबेहड़ ले जाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जहां उसकी माँ को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मामले की सूचना थाना फूलबेहड़ को दी गई, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
राजकिशोर का सबसे सनसनीखेज आरोप पुलिस पर है। उसका कहना है कि उसकी रिपोर्ट तो पुलिस ने लिखी नहीं उल्टे पुलिस चौकी सुंदरवल के दो सिपाही धनंजय तथा मुकेश ने आरोपियों से सांठ-गांठ कर ली और रात में मुझे पकड़कर गाली देते हुए थाना फूलबेहड़ ले गए, मारपीट करते हुए सुलह-समझौते का दबाव बनाया और हवालात में बंद कर दिया और कहा - समझौता कर लो वरना परिवार सहित जेल में सड़ा देंगे।
अगले दिन पुलिस ने झूठा केस बनाकर न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया।
अब घायल पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। उसने अधिकारियों से विपक्षी नितिन, शनि पुत्र सिद्धू वर्मा,सिद्धू वर्मा पुत्र मुन्ना,सुमन पत्नी सिद्धू वर्मा और दोनों सिपाहियों धनंजय व मुकेश के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई है।
इस संबंध में जब जानकारी के लिए थाना कोतवाली निरीक्षक फूलबेहड़ को फोन लगाया गया तो उनसे बात नहीं हो पाई।

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