भाव में भारी गिरावट से जिले के केला किसानों पर संकट गहराया ब्रांड यूपी में केला लखीमपुर जिले की पहचान लागत 1.20 लाख/एकड़ बिक रहा 7 से 11 रुपए में

लखीमपुर खीरी , 0

(मनोज मिश्र/केके शुक्ला)

*धौरहरा/लखीमपुर।* समय के साथ परिवर्तित हुई खेती में जिले के किसानों ने गेहूं धान गन्ना के साथ ही केले की खेती भी करना प्रारंभ कर दिया था जिससे उन्हें कुछ अतिरिक्त लाभ की आशा जगी थी लेकिन गत 2 वर्ष से केले के दामों में आई गिरावट से उनके मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। जिले  में केले की खेती के लिए विख्यात धौरहरा-निघासन क्षेत्र में केले की खेती करने वाले किसानों के सामने एक बार फिर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लगातार गिरते भाव के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
स्थानीय किसान बताते हैं कि केले की फसल तैयार करने में प्रति एकड़ 1 लाख से 1.20 लाख रुपए तक खर्च आता है। इसमें खाद, दवा, मजदूरी, सिंचाई और कटाई-ढुलाई सब शामिल है। लेकिन वर्तमान में जो दाम केले के किसानों को मिल रहे हैं उससे लागत भी नहीं निकल पा रही है।
केले के कारोबार से जुड़े व्यापारी ने बताया कि सीजन की शुरुआत में केले का रेट 23-24 रुपए प्रति किलो तक था। लेकिन पिछले दो महीनों में भाव लगातार गिरे हैं। अभी किसानों से 07 से 11 रुपए प्रति किलो के रेट में खरीदारी की जा रही है। 
उन्होंने गिरावट की वजह बताते हुए कहा - "नोएडा, गाजियाबाद और पंजाब के बड़े व्यापारी अब महाराष्ट्र के नांदेड़ और बुरहानपुर से भी केला उठा रहे हैं इसलिए हमारे क्षेत्र के केले की डिमांड घटी है। ऊपर से एक्सपोर्ट भी बंद बताया जा रहा है, जिसका सीधा असर रेट पर पड़ा है।" 
किसानों एवं व्यापारियों को उम्मीद थी कि 15 अगस्त के बाद त्योहारों की वजह से मांग बढ़ने पर रेट में कुछ सुधार हो सकता है।
ज्ञात हो कि पिछले वर्ष भी उचित मूल्य न मिलने के कारण क्षेत्र के कई किसानों ने अपनी खड़ी खड़ी केले की फसल ट्रैक्टर से जोत दी थी। उस समय भी मंडी में रेट लागत से नीचे चला गया था। इस साल भी हालात लगभग वैसे ही दिख रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द भाव नहीं सुधरे तो उन्हें भी मजबूरन वही कदम उठाना पड़ सकता है।
लगातार नुकसान से किसान बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार धान-गेहूं के लिए समर्थन मूल्य तय करती है, लेकिन बागवानी फसलों की कोई सुध नहीं लेती। 
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि किसानों की इस नाराजगी का असर 2027 के विधानसभा चुनाव में दिख सकता है। किसान पूछ रहे हैं - "आखिर हमारी फसल की जिम्मेदारी कौन लेगा?"
किसान चाहते हैं कि केले के लिए *समर्थन मूल्य* घोषित किया जाए और *एक्सपोर्ट* को बढ़ावा देकर मांग बढ़ाई जाए, कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयां लगाकर बिचौलियों पर लगाम लगे। 
सरकार द्वारा स्वीकृत योजना ब्रांड यूपी में लखीमपुर खीरी जनपद का नाम केले के लिए भी स्वीकृत है।
धौरहरा और निघासन क्षेत्र केले की खेती के लिए पूरे जिले में सबसे आगे हैं। हजारों एकड़ में यहां केले की फसल होती है और सैकड़ों परिवार इसी पर निर्भर हैं। ऐसे में भाव गिरने से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
मामले में किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक पत्र लिखकर बिचौलियों से निजात दिलाने की मांग की है तथा प्रशासन और बागवानी विभाग से किसानों को राहत के उपाय और बाजार हस्तक्षेप की उम्मीद है।

Related Articles

Comments

Back to Top