लखीमपुर लखनऊ मार्ग पर डग्गामार वाहनों के विरोध में अनुबंधित बस यूनियन की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है

लखीमपुर खीरी , 16

लगातार पांचवें दिन भी बसों का संचालन पूरी तरह ठप रहा

जिला प्रशासन और बस यूनियन के बीच हुई हालिया वार्ता भी पूरी तरह बेनतीजा रही


हड़ताल के कारण अब गोला, सीतापुर और कैसरबाग डिपो में भी चक्का जाम होने के आसार बढ़ गए हैं।


डीएम से वार्ता बेनतीजा पांचवें दिन भी थमे अनुबंधित बसों के पहिए, यात्रियों में हाहाकार

लखीमपुर खीरी।लखीमपुर-लखनऊ मार्ग पर अवैध रूप से संचालित हो रहे डग्गामार वाहनों के खिलाफ अनुबंधित बस यूनियन का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अपनी मांगों को लेकर शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल शुक्रवार और शनिवार को भी जारी रही। शुक्रवार को जिला प्रशासन के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक बेनतीजा रहने के बाद यूनियन ने अब पूर्ण चक्का जाम का ऐलान कर दिया है।शनिवार को लगातार पांचवें दिन भी अनुबंधित बसों का संचालन नहीं हो सका, जिससे रोडवेज को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।हड़ताल को समाप्त कराने के लिए शुक्रवार को जिला अधिकारी (डीएम) अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में हरदोई क्षेत्र के आरएम गौरव शर्मा और लखीमपुर की एआरएम गीता सिंह भी मौजूद थीं। चर्चा के दौरान एलआरपी चौराहे से डग्गामार वाहनों को हटाने और जगह खाली कराने पर सहमति तो बनी, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से बस संचालक असंतुष्ट दिखे। अधिकारियों की तरफ से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई।अनुबंधित बस यूनियन के उग्र रुख को देखते हुए अब लखीमपुर के अलावा गोला डिपो, सीतापुर डिपो और लखनऊ के कैसरबाग डिपो की बसें भी बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। यदि ऐसा होता है तो यह हड़ताल और लंबी खिंच सकती है, जिससे पूरा परिवहन तंत्र ठप हो जाएगा।यूनियन के जिला अध्यक्ष श्रवण कुमार गुप्ता और संरक्षक प्रेम प्रकाश बाजपेई ने संयुक्त बयान में कहा, "सड़कों पर अवैध डग्गामार वाहनों के कब्जे के कारण अनुबंधित बसों को सवारियां नहीं मिल रही हैं। हालत यह है कि गाड़ियों के डीजल का पैसा भी नहीं निकल पा रहा है। ऐसे में मोटर मालिकों के सामने बैंक की किस्तें, बीमा, फिटनेस और कर्मचारियों की सैलरी निकालने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आर्थिक तंगी के कारण अब गाड़ियां चलाने की स्थिति ही नहीं बची है।

राजस्व को चम्पत, जनता बेहाल
इस हड़ताल से जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (रोडवेज) को हर दिन लाखों और अब तक कुल करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग चुका है, वहीं आम जनता और दैनिक यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यात्री मजबूरी में डग्गामार वाहनों में महंगे किराए पर सफर करने को मजबूर हैं। बस मालिकों का कहना है कि जब तक प्रशासन डग्गामारों पर पूरी तरह नकेल नहीं कसता, तब तक यह चक्का जाम वापस नहीं लिया जाएगा।

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