यूपी पुलिस में भ्रष्टाचार को लेकर सोशल मीडिया पर पुलिस कांस्टेबल की वीडियो वायरल
लखनऊ May 07, 2026 at 10:20 PM , 28“मुख्यमंत्री जी, आपके नाक के नीचे लखनऊ कमिश्नरेट में वसूली का बड़ा खेल चल रहा
लखनऊ। राजधानी से उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में तैनात कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने पुलिस विभाग के भीतर ड्यूटी लगाने के नाम पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
वायरल वीडियो में कांस्टेबल सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए कहते नजर आ रहे हैं उन्होंने कहा “मुख्यमंत्री जी, आपके नाक के नीचे लखनऊ कमिश्नरेट में वसूली का बड़ा खेल चल रहा है।”
वीडियो में कांस्टेबल ने दावा किया है कि गार्ड ड्यूटी लगाने के बदले सिपाहियों और दीवानों से हर महीने करीब ₹2000 की वसूली की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा खेल संगठित तरीके से चलाया जा रहा है, जिसमें गार्ड कमांडर, गणना प्रभारी और रिजर्व इंस्पेक्टर (RI) तक शामिल हैं।
कांस्टेबल सुनील शुक्ला का कहना है कि केवल लखनऊ की “गणना-डी” से ही हर महीने लगभग ₹8 लाख की अवैध उगाही की जा रही है और यह रकम ऊपर तक पहुंचाई जाती है। वीडियो में उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पहले भी उठ चुके हैं भ्रष्टाचार के सवाल
उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार और पोस्टिंग के नाम पर वसूली के आरोप पहली बार सामने नहीं आए हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में कानपुर में डायल-112 में पोस्टिंग कराने के नाम पर वसूली से जुड़े पत्र वायरल हुए थे, जिसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
वहीं वर्ष 2024 में बलिया में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों के चलते 18 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। इन मामलों के बाद एक बार फिर पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा
लखनऊ का यह वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आम जनता सवाल उठा रही है कि अगर पुलिस विभाग के अंदर ही ड्यूटी और पोस्टिंग के नाम पर पैसों का खेल चल रहा है, तो आम नागरिकों को निष्पक्ष न्याय कैसे मिलेगा।
हालांकि पुलिस प्रशासन की बयान से इस मामले को ले कर ठोस जांच के आदेश दिए गए है, लेकिन वायरल वीडियो के बाद विभागीय जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
अगर लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि और विभागीय व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।































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