कोई इंद्रेश जी जैसा नहीं

लखीमपुर खीरी , 93

गोला गोकर्णनाथ खीरी।
चाणक्य ने कहा था कि ब्राह्मण के घर में पैदा हो जाने से कोई ब्राह्मण नहीं होगा ब्राह्मण का मतलब है सत्य बोलना शुद्ध रहना और नारी को देखकर माता बहन समझना और दूसरे की संपत को रख समझना तब वह ब्राह्मण कहलाया जाएगा ।यह कैसा भट्ट है झूठ के दाम पर बना शंकराचार्य, अविमुक्तेश्वरनंद झूठ की पराकाष्ठा की चादर होड़ करके जो महापुरुषों पर आरोप लगा रहे हैं सरासर निंदनीय है। पता नहीं कैसे शंकराचार्य अभी मुक्तेश्वर नंद है और पता नहीं कैसे यह पंडित है।
जब अविमुक्तेनंद शंकराचार्य जगतगुरु सरस्वती का पद अति गोपनीय गंभीर पद होता है। और 
अविमुक्तेश्वरनंद जिस प्रकार पैसा लेकर के जिले जिले में मारे मारे घूम रहे हैं ना तो पद की गरिमा है और ना समाज की गरिमा  है। इसलिए वह कलनामी है और  आरक्षण के पद पर है यह सिद्ध हो गया है की विद्वान नहीं  है?
 जब वह बोलते हैं तो उनकी नाक पर क्रोध साफ झलकता है ऐसा लगता है कि वह चरस पीते हैं गांजा पीते हैं बोलने में वह फीलिंग में रहते हैं नशे की इसलिए समाज को चाहिए  कि इनका बहिष्कार करें शंकराचार्य के एक भी लक्षण नहीं दिखते इनके अंदर प्रतिशोध साफ झलकता है। कांग्रेस सपा के इशारे पर यह विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं फ्री के हवन में हाथ जलते है लगता है शंकराचार्य भूल गये  इससे सिद्ध होता है न वो शंकराचार्य है न वो ब्राह्मण है न भट्ट है यदि, वो आरोप लगाते की मुसलमानों का धर्मांतरण कराते तो ,समाज को समझ में आता।  हिन्दू कभी भी अपने बहनों को मुसलमानो के हवाले नहीं करसकता ,वो ज़माने गये कि जब जोधा अकबर के पास गयी थी ,अब राम राज्य का जमाना है  यही हिंदुत्व है। ,यही सनातन है संकरा चार्य को सायद मालूम नहीं हिंदुत्व सर्व भौमिक मात्र भाव का उद्देश्य देता है सभी से प्रेम करो किसी से घृणा नहीं हिंदुत्व की शिक्षा यही है  कि राष्ट्र के प्रति निष्ठा पंत संप्रदाय के प्रति गौड़ अब वो तय करे वो कौनसी मानसिकता लेकर चल रहे हैं 
परम पूजनीय गुरुवर डाक्टर इंद्रेश जी जैसा कोई कौम  पैदा नहीं कर सकती ,वो अपने आप में  रामपंथ के शंकराचार्य है, दुनिया के सबसे बड़े संगठन के केन्द्रीय अधिकारी हैं।,ऋषि है,मुनि है,योगी है,तेजेश्वी, तपस्वी है। उनकी एक और पहचान है हम भारतीयो सनातनी मुसलमनों के भाई जान है यह भी उनकी पहचान है मुसलमान उनके ऊपर जान छिड़कता है।

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