पलिया आपूर्ति कार्यालय में 'प्राइवेट' तंत्र का बोलबाला
लखीमपुर खीरी Mar 20, 2026 at 06:20 PM , 97बीमार मुखिया के परिवार का निवाला छीना, फर्जी रिपोर्ट लगाकर काटा राशन कार्ड
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां अंत्योदय और पात्र गृहस्थी योजनाओं के जरिए गरीबों के उत्थान का दावा कर रही है, वहीं लखीमपुर खीरी के पलिया तहसील स्थित पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में भ्रष्टाचार और तानाशाही का काला खेल सामने आया है। आरोप है कि यहाँ तैनात एक निजी (प्राइवेट) कर्मचारी अधिकारियों के संरक्षण में बिना किसी जांच के फर्जी आख्या लगाकर गरीब और पात्र हिंदू परिवारों के राशन कार्ड काट रहा है।
दुःखों के पहाड़ के बीच छीना गया निवाला
ताजा मामला एक ऐसे बीमार राजू कटियार पुत्र शिकायत कर्ता शोभित कटियार हिंदू परिवार का है जो पिछले 15 वर्षों से भीषण तंगी और बीमारी से जूझ रहा है। परिवार के मुखिया फालिश (पैरालिसिस) की चपेट में हैं, जिससे उनकी दुकान बंद हो गई और वे चलने-फिरने से लाचार हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं है; छोटे बच्चे किसी तरह अपनी पढ़ाई और घर का गुजर-बसर कर रहे हैं। इसी बीच, मार्च महीने में पूर्ति कार्यालय के एक प्राइवेट युवक ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के इस परिवार के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट लगा दी और उनका राशन कार्ड निरस्त कर दिया।
10 लाख की 'फर्जी' कार दिखाकर काटा कार्ड
पीड़ित परिवार ने जब इसकी छानबीन की, तो चौकाने वाला खुलासा हुआ। विभाग की रिपोर्ट में पीड़ित परिवार के पास 10 लाख रुपये की कार दिखाई गई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जिस घर में दवा और पढ़ाई के पैसे नहीं हैं, वहां कार की झूठी रिपोर्ट लगाना केवल भ्रष्टाचार और वसूली का जरिया है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराते हुए चुनौती दी है कि यदि कर्मचारी कार नहीं दिखा पाया, तो उस पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
सरकार को बदनाम करने की साजिश
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पूर्ति निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह के संरक्षण में यह प्राइवेट कर्मचारी बड़े पैमाने पर धांधली कर रहा है। चर्चा यह भी है कि जानबूझकर पात्र हिंदू परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे जनता में आक्रोश फैले और वर्तमान भाजपा सरकार की छवि धूमिल हो। आखिर एक प्राइवेट युवक को सरकारी फाइलों और पोर्टल पर आख्या लगाने का अधिकार किसने दिया।
जनता से अपील और जांच की मांग
पलिया के मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में ऐसे सैकड़ों परिवार हो सकते हैं जो इस 'मठाधीश' कार्यशैली का शिकार हुए हैं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि निरस्त किए गए सभी राशन कार्डों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हो।दोषी प्राइवेट कर्मचारी और उसे शह देने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस 'प्राइवेट गुंडागर्दी' पर लगाम लगाता है या गरीब परिवार यूं ही घुट-घुट कर जीने को मजबूर रहेंगे। इस संबंध में जब पूर्ति निरीक्षक से उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया इसलिए उनका पक्ष नहीं मिल पाया।






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