केवल वोटों के लालच में मत सवर्ण बलिदान करो

लखीमपुर खीरी , 117

आज हमारे घर पर दिखते संकट के बादल छाए,

लाना था यू सी सी लेकिन तुम यूजीसी ले आए,
जिन पंडित ठाकुर बनियों ने तुमको अपना खून दिया,
उनकी ही हत्या को तुमने यह काला कानून दिया ,
"अमल" समय है अभी बैठ लो इस पर पुनर्विचार करो,
अब तक करते आए हो पर अब मत अत्याचार करो, 
अत्याचारों को सहने की कोई सीमा होती है,
आखिर दब कर रहने की कोई सीमा होती है,
ऐसा हो विधान जिससे बच्चे विद्यालय में नहीं डरें,
ऐसा हो विधान जिससे बच्चे कुंठित हो नहीं मरें,
भारत की प्रतिभाओं का मत असमय अवसान करो,
केवल वोटो के लालच में मत सवर्ण बलिदान करो।

समरसता के चूरन में अब जातिवाद का जहर घोल कर,
कितना और छलोगे आखिर बतला दो कुछ स्वयं बोलकर,
वोटो के कारण जिनको कानूनो की रेवड़ी बांट रहे हो,
सत्ता के लालच में जिनके ये तुम तलवे चाट रहे हो,
चाटो लेकिन याद रहे ये देश शिवा जी का भी है,
बाजी राव पेशवा का बलिदानी संभाजी का भी है,
राणा प्रताप का है भारत ये बप्पा रावल का भी है,
आजाद भगत का है भारत ये भारत बिस्मिल का भी है,
भामाशाहों ने इसकी सेवा में धन अपने लोहू से सना दिया,
इन सबके भारत को तुमने बस भीमराव का बना दिया,
इनके वंशज चीख रहे हैं मत इनका अपमान करो,
केवल वोटो के लालच में मत सवर्ण बलिदान करो।
--- अनिल अमल, लखीमपुर खीरी

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