स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित ने सम्मान लेने से किया इनकार मामला ट्रस्ट व स्मारक से अंग्रेज कलेक्टर का नाम हटाने का
लखीमपुर खीरी Jan 24, 2026 at 07:15 PM , 163(हरिशंकर मिश्र/केके शुक्ला)
लखीमपुर-खीरी। अंग्रेज कलेक्टर विलोबी का नाम न हटने तक सेनानी आश्रित ने सम्मान लेने से इंकार किया है।
जानकारी के अनुसार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित जिले के वरिष्ठ पत्रकार नन्द कुमार मिश्र ने विलोबी मेमोरियल ट्रस्ट से अंग्रेज कलेक्टर आईसीएस विलोबी का नाम न हटने तक जिला प्रशासन द्वारा दिया जाने वाला सम्मान लेने से इंकार कर दिया है। उन्होंने इसे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर डीएम को ज्ञापन, गृह विभाग को पत्र और मीडिया में खबरें आने के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई न होने से नाराज़गी जताई।
उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लिखा
*सम्मानित जिलाधिकारी जी के ध्यानार्थ*
विलोबी मेमोरियल ट्रस्ट लखीमपुर से विलोबी का नाम न हटने तक *स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित के कारण मिलने वाला जिला प्रशासन लखीमपुर द्वारा दिया जाने वाला सम्मान नही लूंगा। यह निर्णय लेते हुए बहुत तकलीफ हो रही है।*
द्वारा
नन्द कुमार मिश्र
आश्रित व उत्तराधिकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नाना पंडित राम आसरे शुक्ला व स्वतंत्रता सेनानी मामा हरि राम शुक्ला कटनाश मोह नौरंगाबाद लखीमपुर खीरी।
त्याग
नाना करीब दस साल जेल में रहे। दुकान नीलाम हुई। कई बार अर्थ दंड मिला।
खीरी के दो सेनानियों को 12 बेंत की सजा मिली उसमे एक नाना जी भी थे। शासन ने लखीमपुर में उनके नाम से मार्ग का नामकरण भी किया।
मामा भी फ्रीडम फाइटर रहे।
आजादी के दौरान कैंसर से निधन हुआ।
सम्मान न लेने के पीछे कारण
Ics विलोबी 1920 में जिले के कलेक्टर थे। 26 अगस्त 1920 में तीन फ्रीडम फाइटर्स ने उनकी सर काट कर हत्या कर दी।
तीनों को फांसी दी गयी। अंग्रेजो ने अपने मृत कलेक्टर की याद में 1924 में विलोबी मेमोरियल ट्रस्ट का पंजीकरण किया। 101 साल से यह ट्रस्ट चल रहा है। 60 के करीब दुकाने हैं। लाखों वर्ग फिट का मैदान है। सभागार है। लाइब्रेरी है।
विलोबी तो देश का दुश्मन था। उसने स्मारक बनवाने का कोई कृत्य नही किया।
एक साल से इस बारे में सैकड़ो न्यूज़ प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रकाशित हुई। DM को ज्ञापन दिए गए। गृह विभाग से भी इस बारे में DM को पत्र भी आया। 2 अक्टूबर 25 को आश्रितों ने अनुरोध किया। DM ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नही की।
इस हालत में यह तो अपमान है। *सम्मान का कोई औचित्य नही।*






_page-0001.jpg)
























Comments