36 घंटे बाद नहीं दर्ज वकीलों की तहरीर पर रिपोर्ट, जिले की सभी तहसीलों के अधिवक्ता हड़ताल पर,
लखीमपुर खीरी Jan 20, 2026 at 04:03 PM , 71जिला प्रशासन को न जनता की सुध, न ही वकीलों की! पूरे जिले के बादकारी कर रहे सफर।
विश्वकांत त्रिपाठी
पलिया कलां लखीमपुर खीरी। 13 जनवरी को पलिया तहसील के कंबल प्रकरण ने भीषण ठंढ में प्रशासन और वकीलों के मध्य गर्मी का वातावरण पैदा कर दिया, अब धीरे-धीरे इसकी आज राजधानी तक पहुंच चुकी है, इसके बावजूद वकीलों की तहरीर देने के 36 घंटे बाद भी पुलिस ने अभी तक संबंधितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का मन भी नहीं बनाया।
इससे यह सिद्ध हो रहा है की ट्रिपल इंजन की सरकार आम जनता के सुख-दुख के लिए कितनी जागरुक है कहने का तात्पर्य है कि भीषण शीतलहर में गरीबों को नि:शुल्क वितरण के लिए आए कंबल भी रात के अंधेरे में बिना प्रपत्रों के कहां जा रहे थे इसका जवाब तो दूर की बात जबाब मांगनें पर अधिकारी भी भड़क उठे,"तो समझो दाल मे कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है",
पूरे जिले के सभी तहसीलों के अधिवक्ता कंबल प्रकरण के बाद हड़ताल पर है, खेती किसानी,जाति, निवास, आय व अन्य राजस्व संबंधी तमाम मामलों को लेकर हज़ारों आम नागरिक तहसील के चक्कर लगा बैरंग लौट रहे हैं, क्योंकि बिना वकील के कोई काम संभव नहीं, जिले की सभी तहसीलों के वकील हड़ताल पर है जिला प्रशासन को न जनता की सुध है न वकीलों की।
वहीं मंगलवार को पूरा पलिया तहसील परिसर पुलिस-पी.ए.सी के बूटों की खट-पटाहट और वकीलों के उत्तेजित नारों से गूंजता रहा, तथा आम बादकारी सफर करता देखा गया, जिससे काम और दाम दोनों की बर्बादी हो रही है, वकील और प्रशासन की तकरार से आम जनमानस पर काम-धाम का बोझ बढ़ रहा है और जिम्मेदार आज एक सप्ताह बीतने के बाद भी कुम्भ कर्मी नींद मे है।
इसबाबत पलिया के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने मंगलवार छठे दिन भी तहसील परिसर में बैठक कर अपनी अपनी बात कहते हुए अधिकारियों के विरोध में जिंदाबाद-मुर्दाबाद वकीलों की तहरीर पर संबंधितोंके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को जुलूस निकाल कर रोड जाम करने के साथ पलिया एसडीएम हटाओ की नारेबाजी करते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे, लेकिन फिलहाल तो नतीजा सिफर ही है और गेंद जिले के उच्च अधिकारियों के पाले में है अब समय ही बताएगा एसडीएम रहेंगे या जाएंगे,अथवा वकीलों के शिकायती पत्र पर मुकदमा दर्ज होगा या यूं ही वकील लेखपाल की शिकायत पर मुजरिम बने रहेंगें।






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