*संस्कृत और एआई के समन्वय से तैयार होगा भारत का ज्ञान-भविष्य: प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी 21 दिवसीय समर स्कूल कार्यशाला का शुभारम्भ*

राजस्थान , 19

नागपुर।
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ जोड़कर भविष्य की ज्ञान संरचना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं इम्मवर्स इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में “Building Civilizational AI from Bharat” विषयक 21 दिवसीय समर स्कूल कार्यशाला का रविवार को नागपुर में शुभारम्भ हुआ।
5 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 23 प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों से चयनित 30 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। प्रतिभागियों में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के छात्र-छात्राएँ शामिल हैं, जिन्हें संस्कृत और एआई के अंतर्संबंधों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि संस्कृत और एआई का समन्वय आज समय की बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह कार्य चुनौतीपूर्ण अवश्य है, लेकिन उपलब्ध संसाधनों और सकारात्मक संभावनाओं को देखते हुए योजनाबद्ध तरीके से तत्काल कार्य शुरू किया जाना चाहिए। उनके अनुसार विश्वविद्यालय स्तर पर इस प्रकार का व्यावहारिक प्रशिक्षण संस्कृत जगत के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व प्रथम कुलपति प्रो. पंकज चांदे ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के बीच सेतु निर्माण का अभियान है। उन्होंने कहा कि जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक भविष्य को आकार दे रही है, तब भारत के शास्त्र, भाषाएँ और बौद्धिक विरासत भी इस परिवर्तन का सक्रिय हिस्सा बननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में उपलब्ध करोड़ों पांडुलिपियों का बड़ा हिस्सा अभी भी डिजिटल स्वरूप में नहीं आ पाया है। केवल स्कैनिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्राचीन लिपियों की पहचान, पाठ पुनर्निर्माण और उन्हें एआई उपयोग योग्य डेटा में परिवर्तित करना अगली बड़ी चुनौती है। विशिष्ट अतिथि एवं इम्मवर्स इनोवेशन्स के संस्थापक एवं सीईओ आर. रामकृष्णन ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर में ज्ञान का विशाल भंडार निहित है। संस्थान का लक्ष्य ऐसा “सिविलाइजेशनल एआई” विकसित करना है जो भारत की भाषाई और ज्ञानगत विविधता को समझने में सक्षम हो।
समर स्कूल के समन्वयक एवं निदेशक केन्द्रीय योजना प्रो. मधुकेश्वर भट्ट ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान भारतीय ज्ञान प्रणाली, ग्रंथों के डिजिटलीकरण, भाषा प्रौद्योगिकी, मशीन लर्निंग तथा एआई आधारित नवाचारों पर व्यावहारिक सत्र और परियोजना आधारित गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम में सह-संस्थापक प्रीति रामकृष्णन, डॉ. योगेन्द्र दीक्षित, डॉ. अमृता कौर तथा स्थानीय समन्वयक अनुराग श्रीवास्तव सहित शोधार्थी एवं तकनीकी टीम के सदस्य उपस्थित रहे। मंच संचालन अमय वैद्य ने तथा आभार प्रदर्शन आस्था चौहान ने किया।

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