तारबंदी योजना में किसानों को राहत: लागत घटाने के लिए नियमों में शिथिलता, अनुदान बढ़ाने पर भी विचार
राजस्थान Feb 23, 2026 at 02:15 PM , 125जयपुर, 23 फरवरी। प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा में घोषणा की कि राज्य सरकार किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से तारबंदी योजना के नियमों में समय-समय पर शिथिलता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को फसलों को नीलगाय, जंगली जानवरों और निराश्रित पशुओं से बचाने के लिए अधिक से अधिक सहायता उपलब्ध कराना है।
नियमों में प्रमुख बदलाव
प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुभाष मील के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि—
पहले हर 10 फीट पर पोल लगाने का नियम था, जिसे बढ़ाकर 15 फीट कर दिया गया है।
6 तार और 2 क्रॉस वायर की अनिवार्यता को घटाकर अब 5 वायर मान्य किए गए हैं।
पहले हर 10वें पोल पर सपोर्ट पोल अनिवार्य था, जिसे बढ़ाकर 15वां पोल कर दिया गया है।
पोल के लिए फाउंडेशन की अनिवार्यता में छूट दी गई है।
चेन लिंक जाली के स्थान पर नोटेड जाली लगाने पर भी अनुदान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन संशोधनों से किसानों की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
खंडेला क्षेत्र में प्रगति
कृषि मंत्री ने बताया कि खंडेला विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2017-18 से 2025-26 (10 फरवरी 2026 तक) कुल 4482 किसानों ने आवेदन किए। इनमें से—
540 किसानों को कार्य पूर्ण करने पर 150.18 लाख रुपये का अनुदान दिया गया।
1190 आवेदन वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं।
शेष आवेदन निर्धारित मापदंड पूरे नहीं करने के कारण अपात्र पाए गए।
अपात्रता के प्रमुख कारण
मंत्री ने स्पष्ट किया कि कई मामलों में निम्न कारणों से आवेदन निरस्त किए गए—
खसरा क्षेत्रफल में अंतर या खसरा नंबरों का एक परिधि में न होना
प्री-वेरिफिकेशन से पहले ही तारबंदी किया जाना
समूह आवंटन में सहमति का अभाव
आवेदक की मृत्यु
आर्थिक स्थिति या खेत में फसल होने के कारण कार्य संभव न होना
अनुदान की वर्तमान व्यवस्था
प्रदेश में तारबंदी कार्यक्रम के अंतर्गत 400 रनिंग मीटर तक निम्नानुसार अनुदान दिया जा रहा है—
लघु एवं सीमांत कृषक: इकाई लागत का 60% या अधिकतम ₹48,000
सामान्य कृषक: 50% या अधिकतम ₹40,000
सामुदायिक स्तर पर: 70% या अधिकतम ₹56,000
वनाधिकार पट्टा धारक कृषक: 90% या अधिकतम ₹72,000
400 रनिंग मीटर से कम परिधि होने पर अनुदान प्रो-रेटा आधार पर दिया जाता है।
‘पहले आओ, पहले पाओ’ आधार पर निस्तारण
कृषि मंत्री ने बताया कि योजना के तहत आवेदनों का निस्तारण प्राप्त लक्ष्यों के अनुरूप ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाता है। दस्तावेज सत्यापन, प्री-वेरिफिकेशन, प्रशासनिक स्वीकृति और भौतिक सत्यापन के विभिन्न स्तरों पर लंबित पत्रावलियां आगामी वर्षों में भी उसी स्तर पर शामिल रहती हैं। पात्रता पूर्ण करने वाले किसानों के आवेदन जिला वरीयता के आधार पर स्वीकृत किए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार वित्तीय स्थिति के अनुरूप अनुदान राशि बढ़ाने पर विचार कर सकती है।






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