इस गाँव की महिलायें साल में पाँच दिन निर्वस्त्र रहती हैं !
परिवेश Jul 20, 2023 at 11:52 PM , 871अम्रेन्द्र सहाय अमर
हमारे देश में कई तरह की परंपराओं को अपनाया जाता हैं। हर राज्य की अपनी परंपरा होती है। ऐसी कई परंपराएं हैं, जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे। सुनने में भले ही आपको अजीब लगे, लेकिन भारत में एक जगह ऐसी भी है, जहां की शादीशुदा महिलाएं 5 दिनों तक कपड़े नहीं पहनती है। इन पांच दिनों में वो बिना कपड़ों के ही रहती है। ऐसा सालों से चलता आ रहा है और वो इसे अभी भी निभा रही है। शायद आप विश्वास न करें, लेकिन यह सत्य है कि इस गाँव की महिलाएं साल में पाँच दिन निर्वस्त्र रहती हैं. हालाँकि यह महिलाएं इस दौरान पुरुषों के पास नही आती हैं. इस दौरान महिला का पति भी अपनी पत्नी के पास नहीं जाता है. महिला को घर के अन्दर ही बंद रहना पड़ता है. इस दौरान इन्हें हंसने मुस्कराने और घर से बाहर निकलने पर पाबंदी होती है. हमारा देश भारत विविधताओं का प्रदेश है. ना जाने कितनी संस्कृतियाँ, परम्पराएँ इस देश में फलती फूलती और पोषित होती हैं. कुछ विचित्र परम्पराएँ भी फलती फूलती हैं, जिन पर विश्वास कर पाना मुश्किल होता है. आज हम बात कर रहे हैं, हिमांचल प्रदेश के कुल्लू जनपद के मणिकर्ण घाटी के पीणी गाँव की. इस परम्परा को सावन के महीने में निभाया जाता है जो कि पीढ़ियों से चली आ रही है. कहा जाता है अगर कोई विवाहित महिला इस परम्परा को नही निभाती है, तो उसके घर में अशुभ हो जाता है. इस दौरान विशेष पूजा की जाती है. इन दिनों पुरुष लोग भी तमाम तरह की बुराइयों से दूर भी दूर रहते हैं. यह आयोजन उस घटना की याद में किया जाता है, जब लाहू घोंड देवता ने भाद्रब महीने के पहले एक दिन राक्षस को हराया था. ऐसी जनश्रुति है कि लाहू घोंड देवता जब इस गांव में आए थे, तो यहां उस दौरान राक्षसों ने आंतक मचाया हुआ था, लेकिन देवता के पीणी में आते ही राक्षसों का विनाश हो गया. इसके बाद से ही ये परंपरा चली आ रही है, जिसे आज भी वहां के लोग निभा रहे हैं. कहा जाता है कि सदियों पहले एक राक्षस सुंदर कपड़े पहनने वाली महिलाओं को उठाकर ले जाता थाऔर उनके साथ मनमानी करता था. माना जाता है कि लाहुआ देवता आज भी इस गांव में आते हैं, और बुराइयों से उनकी रक्षा करते हैं. यह परम्परा मनाने की तारीख है, 17 अगस्त से 21 अगस्त. यह परम्परा अभी भी पीढ़ियों से चलती चली आ रही है. इन दिनों महिलाये अपने घर में निर्वस्त्र रहती हैं वे केवल ऊन से बना पट्टू ओढ़कर रहती हैं. इस दौरान पुरुष भी शराब नहीं पीते. मांस भी नही खाते, तमाम तरह की बुराइयों से दूर रहते हैं. लेकिन जैसे-जैसे समय बड़ा है वैसे-वैसे लोगों की कई चीजों में बदलाव देखने को मिला है. अब इस परंपरा का पालन करने के लिए महिलाएं पांच दिन तक कपड़े नहीं बदलती. अब वे एक बेहद पतला कपड़ा पहनती हैं, लेकिन 5 दिन कपड़ों से दूर रहती हैं।इस गाँव की महिलायें साल में पाँच दिन निर्वस्त्र रहती हैं !
अम्रेन्द्र सहाय अमर
हमारे देश में कई तरह की परंपराओं को अपनाया जाता हैं। हर राज्य की अपनी परंपरा होती है। ऐसी कई परंपराएं हैं, जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे। सुनने में भले ही आपको अजीब लगे, लेकिन भारत में एक जगह ऐसी भी है, जहां की शादीशुदा महिलाएं 5 दिनों तक कपड़े नहीं पहनती है। इन पांच दिनों में वो बिना कपड़ों के ही रहती है। ऐसा सालों से चलता आ रहा है और वो इसे अभी भी निभा रही है। शायद आप विश्वास न करें, लेकिन यह सत्य है कि इस गाँव की महिलाएं साल में पाँच दिन निर्वस्त्र रहती हैं. हालाँकि यह महिलाएं इस दौरान पुरुषों के पास नही आती हैं. इस दौरान महिला का पति भी अपनी पत्नी के पास नहीं जाता है. महिला को घर के अन्दर ही बंद रहना पड़ता है. इस दौरान इन्हें हंसने मुस्कराने और घर से बाहर निकलने पर पाबंदी होती है. हमारा देश भारत विविधताओं का प्रदेश है. ना जाने कितनी संस्कृतियाँ, परम्पराएँ इस देश में फलती फूलती और पोषित होती हैं. कुछ विचित्र परम्पराएँ भी फलती फूलती हैं, जिन पर विश्वास कर पाना मुश्किल होता है. आज हम बात कर रहे हैं, हिमांचल प्रदेश के कुल्लू जनपद के मणिकर्ण घाटी के पीणी गाँव की. इस परम्परा को सावन के महीने में निभाया जाता है जो कि पीढ़ियों से चली आ रही है. कहा जाता है अगर कोई विवाहित महिला इस परम्परा को नही निभाती है, तो उसके घर में अशुभ हो जाता है. इस दौरान विशेष पूजा की जाती है. इन दिनों पुरुष लोग भी तमाम तरह की बुराइयों से दूर भी दूर रहते हैं. यह आयोजन उस घटना की याद में किया जाता है, जब लाहू घोंड देवता ने भाद्रब महीने के पहले एक दिन राक्षस को हराया था. ऐसी जनश्रुति है कि लाहू घोंड देवता जब इस गांव में आए थे, तो यहां उस दौरान राक्षसों ने आंतक मचाया हुआ था, लेकिन देवता के पीणी में आते ही राक्षसों का विनाश हो गया. इसके बाद से ही ये परंपरा चली आ रही है, जिसे आज भी वहां के लोग निभा रहे हैं. कहा जाता है कि सदियों पहले एक राक्षस सुंदर कपड़े पहनने वाली महिलाओं को उठाकर ले जाता थाऔर उनके साथ मनमानी करता था. माना जाता है कि लाहुआ देवता आज भी इस गांव में आते हैं, और बुराइयों से उनकी रक्षा करते हैं. यह परम्परा मनाने की तारीख है, 17 अगस्त से 21 अगस्त. यह परम्परा अभी भी पीढ़ियों से चलती चली आ रही है. इन दिनों महिलाये अपने घर में निर्वस्त्र रहती हैं वे केवल ऊन से बना पट्टू ओढ़कर रहती हैं. इस दौरान पुरुष भी शराब नहीं पीते. मांस भी नही खाते, तमाम तरह की बुराइयों से दूर रहते हैं. लेकिन जैसे-जैसे समय बड़ा है वैसे-वैसे लोगों की कई चीजों में बदलाव देखने को मिला है. अब इस परंपरा का पालन करने के लिए महिलाएं पांच दिन तक कपड़े नहीं बदलती. अब वे एक बेहद पतला कपड़ा पहनती हैं, लेकिन 5 दिन कपड़ों से दूर रहती हैं।































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