अदभुत द्वार: नरक का द्वार
परिवेश Nov 13, 2022 at 11:52 PM , 982साइबेरिया में याना नदी घाटी के पास जंगलों में जमीन में एक बहुत बड़ा गड्ढा है. इसे बाटागिका क्रेटर के नाम से जाना जाता है.
यह करीब एक किलोमीटर लंबा, 85 मीटर चौड़ा और 282 फुट गहरा है. हालांकि यह आंकड़ा जल्द ही बदल भी सकता है क्योंकि यह तेजी से बढ़ रहा है. कुछ स्थानीय लोग यहां जाने से बचते हैं. वो इसे नर्क का द्वार की संज्ञा देते हैं लेकिन वैज्ञानिक इसे अतीत में जाने की खिड़की बता रहे हैं..
वैज्ञानिकों का कहना है यहाँ पृथ्वी के दो लाख साल का विस्तृत इतिहास छिपा है, जिसे खोजनी की ज़रुरत है. किसी विशालकाय जानवर की तरह इसका सिर ही पहले नजर आता है. बाटागिका क्रेटर नाटकीय तौर पर सामने आया.
माना जा रहा है कि यह गड्ढा वहां स्थाई रूप से जमी हुई बर्फ़ के पिघलने के बाद नजर आना शुरू हुआ.
र्मनी के अल्फ्रेड वेगनर इंस्टीट्यूट के फ्रैंक गुंटर और उनके साथियों के अध्ययन के मुताबिक़ इस बाटागिका क्रेटर की दीवार हर साल औसतन 10 मीटर बढ़ रही है.लोग कहते हैं जिस साल तापमान बहुत अधिक होता है, उस साल यह 30 मीटर तक बढ़ जाती है.
गुंटर और उनके साथियों ने इस जगह का करीब एक दशक तक अध्ययन किया है. यह गड्ढा एक ही समय में भूत, भविष्य और वर्तमान के बारे में जानने का अवसर देता है.
यहां नजर आई गड्ढे के परतों से यह पता चला है कि दो लाख साल पहले इस इलाक़े का वातावरण कैसा था. पेड़ों के अवशेष, पराग और जानवरों के अवशेषों से पता चलता है कि एक समय यह इलाका एक घना जंगल रहा होगा.
यहां की भूगर्भीय जानकारी हमें यह समझने में मदद कर सकती है कि भविष्य में यह इलाका ग्लोबल वॉर्मिंग को किस रूप में लेगा. इस गड्ढे में हो रहा विकास इस बात का संकेत है कि स्थाई रूप से जमी हुई बर्फ़ पर जलवायु परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ रहा ह. इंग्लैंड के ससेक्स विश्वविद्यालय के प्रेमाफ्रोस्ट साइंस के प्रोफेसर जुलियन मुर्टन कहते हैं, ''इस गड्ढे के सामने आने की प्रक्रिया की शुरुआत 1960 के दशक में हुई.'
इस इलाके में बड़े पैमाने पर जंगलों का कटान हुआ. इसका मतलब यह हुआ कि गर्मी के दिनों में इस इलाके में पेड़ों की छाया नहीं रही. सूर्य की रोशनी ने पेड़-पौधों की गैर मौज़ूदगी में इस इलाके को गर्म कर दिया.
मुर्टन कहते हैं, कम छाया और नमी के इस गठजोड़ ने सतह पर गर्मी बढ़ाने में मदद की. जमी हुई जमीन के पिघलने से हमें यहां भविष्य में केवल गड्ढे ही नहीं बल्कि झरने और झीलें भी दिखाई देंगी.
वैज्ञानिक अभी भी गाद का विश्लेषण कर इस गड्ढे के बनने के कालक्रम के बारे में पता लगा रहे हैं. यह पता करना इसलिए भी जरूरी है कि साइबेरिया का जलवायु इतिहास अभी भी एक रहस्य बना हुआ है. अतीत में हुए जलवायु परिवर्तन का पुननिर्माण कर वैज्ञानिक भविष्य में होने वाली उसी तरह के परिवर्तन की उम्मीद जता रहे हैं.































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