अदभुत दहेज:दहेज में सांप

परिवेश , 709

दहेज का अर्थ है जो सम्पत्ति, विवाह के समय वधू के परिवार की तरफ़ से वर को दी जाती है. दहेज को उर्दू में जहेज़ कहते हैं. यूरोप, भारत, अफ्रीका और दुनिया के अन्य भागों में दहेज प्रथा का लंबा इतिहास है. भारत में इसे दहेज, हुँडा या वर-दक्षिणा के नाम से भी जाना जाता है तथा वधू के परिवार द्वारा नक़द या वस्तुओं के रूप में यह वर के परिवार को वधू के साथ दिया जाता है. आज के आधुनिक समय में भी दहेज़ प्रथा नाम की बुराई हर जगह फैली हुई है. पिछड़े भारतीय समाज में दहेज़ प्रथा अभी भी विकराल रूप में है.
बेटी की शादी में पिता अपनी खुशी से पैसों से लेकर गाड़ी तक उपहार स्वरूप भेंट करता है. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि दहेज में जहरीले सांप भी दिए जाते हैं. ये बात जानकर आपको हैरानी तो हो रही होगी, लेकिन यह सौ फीसदी सच है. इस प्रथा का चलन हमारे ही देश में मध्य प्रदेश के एक विशेष समुदाय में है. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
मध्य प्रदेश के गौरिया समुदाय के लोग अपने दामाद को दहेज में 21 जहरीले सांप देते हैं. इस समुदाय में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता है कि अगर इस समुदाय से जुड़ा कोई शख्स अपनी बेटी को शादी में सांप नहीं देता है, तो उसकी बेटी की शादी जल्दी ही टूट जाती है. कहते हैं कि बेटी की शादी तय होते ही पिता अपने दामाद को तोहफा देने के लिए सांप पकड़ना शुरू कर देते हैं. इनमें गेंहुअन, कोबरा  जैसे जहरीले सांप भी होते हैं. यहां के बच्चों को भी उन जहरीले सांपों से डर नहीं लगता बल्कि वो उनके साथ आराम से खेलते नजर आते हैं.
दरअसल, इस समुदाय के लोगों का मुख्य पेशा सांप पकड़ना है और वो उन्हें लोगों को दिखाकर पैसा कमाते हैं. यही वजह है कि पिता अपनी दामाद को दहेज में सांप देता है, ताकि वो इन सांपों के जरिए कमाई कर सके और परिवार का पेट पाल सके. इस समुदाय में सांपों को सुरक्षित रखने के लिए कड़ा नियम भी बनाया गया है. कहते हैं कि अगर सांप इनके पिटारे में मर जाता है, तो पूरे परिवार के लोगों को मुंडन कराना पड़ता है. साथ ही समुदाय के सभी लोगों को भोज करना पड़ता है.
सांप इनके घरों में यूं ही घूमते रहते हैं. इनके पालतू सांप की मृत्यु हो जाने पर यहां सरसम्मान से उसका अंतिम संस्कार करते हैं. साथ ही परिवार का सदस्य मानकर दाढ़ी मूंछ भी बनवाते हैं. इनका मानना है कि यह सांप जहां भगवान शिव के वरदान के रूप में उन्हें मिला है और उनकी जीविका का साधन है इस वजह से इनमें सांपों को लेकर विशेष सम्मान है. नाग पंचमी में यह लोग आज भी सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वाह करते हुए लोगों को नाग देवता के दर्शन कराने के लिए निकालते हैंA

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