अदभुत नदी : विश्व की सबसे लम्बी नदी
परिवेश Sep 25, 2020 at 10:53 PM , 1052नील नदी का उपहार कहा जाने वाला मिस्र उत्तर-पूर्वी अफ्रीका का एक देश है, जिसका लगभग एक तिहाई भाग मरुस्थल है. मिस्र की सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है. इस देश का लिखित इतिहास ईसा पूर्व 5000 वर्ष से भी पहले का मिलता है. इजिप्ट अफ्रीका महाद्वीप का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है.
मिस्र का विस्तृत और समृद्ध साहित्य यहाँ की संस्कृति और अरबी का महत्वपूर्ण अंग है. अरबी साहित्य में आधुनिक शैली के प्रयोगों की शुरुआत मिस्र के उपन्यासकार और कवियों ने ही की थी. उनके द्वारा विकसित लेखन शैली का आगे चलकर काफी अनुसरण किया गया.
मिस्र का कुल कृषि क्षेत्र नील नदी के डेल्टा वाला भाग है, जिसे निचला मिस्र कहते हैं. यहाँ की मुख्य फसलें हैं - कपास, प्याज, आलू, गेहूँ, मक्का, ज्वार-बाजरा, चावल, गन्ना और विभिन्न फल. मिस्र 'लीग ऑफ अरब स्टेट्स' का सदस्य है. यदि इजिप्ट में नील नदी नहीं होती तो यह पूरा देश एक मरुस्थल ही होता, इसलिए मिस्र को नील नदी का उपहार कहा जाता है.
नील नदी दुनिया के सबसे लम्बी नदी है. यह 6853 किलोमीटर में अफ्रिका महाद्वीप में बहती है. नील नदी विक्टोरिया झील से शुरू होकर अफ्रीका के पूर्वी भाग से गुजरती हुयी भूमध्य सागर में गिरती है. यह लगभग 11 देशों से होकर गुजरती है. सफेद नील और नीली नील इसकी मुख्य सहायक नदियाँ हैं, नील नदी ने मिस्र के समाज और जीवन को काफी प्रभावित किया है. यह नदी प्राचीन मिस्र के लोगों को भोजन, परिवहन और घर बनाने के सामान तथा अनमोल वस्तुएं उपलब्द्ध करती है .मिस्र की प्राचीन सभ्यता का भारत मिलान करें तो कोई समानता नही मिलती है. परन्तु अगर भारत में जीवन दायिनी गंगा है तो मिस्र में नील नदी. दोनों ही देशों में अगर यह नदियाँ न होती तो क्या हालत होती इसकी कल्पना भी भयावह है. दोनो देश रेगिस्तान होते. मिस्र में गाय को सबसे अधिक सम्मान दिया जाता है क्योंकि वह एक उपयोगी पशु है. इसी तरह भारत में भी गाय को गो माता का दर्ज़ा प्राप्त है.
नील नदी की घाटी एक सँकरी पट्टी सी है जिसके अधिकांश भाग की चौड़ाई 16 किलोमीटर से अधिक नहीं है, कहीं-कहीं तो इसकी चौड़ाई 200 मीटर से भी कम है. अपने मुहाने पर यह 160 किलोमीटर लम्बा तथा 240 किलोमीटर चौड़ा विशाल डेल्टा बनाती है. घाटी का सामान्य ढाल दक्षिण से उत्तर की ओर है. मिस्र की प्राचीन सभ्यता का विकास इसी नदी की घाटी में हुआ है. इसी नदी पर मिस्र देश का प्रसिद्ध अस्वान बाँध बनाया गया है.
नील नदी की घाटी का दक्षिणी भाग भूमध्य रेखा के समीप स्थित है, अतः वहाँ भूमध्यरेखीय जलवायु पायी जाती है. यहाँ वर्ष भर ऊँचा तापमान रहता है तथा वर्षा भी वर्ष भर होती है. वार्षिक वर्षा का औसत 212 से. मी. है. उच्च तापक्रम तथा अधिक वर्षा के कारण यहाँ भूमध्यरेखीय सदाबहार के वन पाये जाते हैं. नील नदी के मध्यवर्ती भाग में सवाना तुल्य जलवायु पायी जाती है जो उष्ण परन्तु कुछ विषम है एवं वर्षा की मात्रा अपेक्षाकृत कम है. इस प्रदेश में सवाना नामक उष्ण कटिबन्धीय घास का मैदान पाया जाता है. यहाँ पाये जाने वाले गोंद देने वाले पेड़ो के कारण सूडान विश्व का सबसे बड़ा गोंद उत्पादक देश है. उत्तरी भाग में वर्षा के अभाव में खजूर, कँटीली झाड़ीयाँ एवं बबूल आदि मरुस्थलीय वृक्ष मिलते हैं. उत्तर के डेल्टा क्षेत्र में भूमध्यसागरीय जलवायु पायी जाती है, जहाँ वर्षा मुख्यतः जाड़े में होती है.































Comments