टैरिफ संरचना के स्लैब परिवर्तन करने के प्रस्ताव पर उपभेाक्ता परिषद ने विरोध जताया

हेडलाइंस , 339

लखनऊ। पावर कारपोरेशन द्वारा ऊर्जा विभाग से अनुमोदन लेकर टैरिफ संरचना के स्लैब परिवर्तन करने के प्रस्ताव पर गुरुवार को उप्र राज्य विद्युत उपभेाक्ता परिषद ने विरोध जताया है। उपभेाक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग में एक विधिक प्रस्ताव देकर पूरी प्रक्रिया का विरोध किया। इस दौरान अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि टैरिफ संरचना में कोई भी बदलाव जो भार घटक व वोल्टेज घटक के आधार पर पावर कारपोरेशन ने विद्युत नियामक आयेाग में प्रस्तावित किया है। वह विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 62 (3) का खुला उलंघन है। कारण है कि भार घटक व वोल्टेज घटक के अनुसार संरचना में बदलाव का अधिकार केवल विद्युत नियामक आयेाग को है लेकिन पावर कारपोरेशन ने ऊर्जा विभाग से जो अनुमोदन लिया है।

उसमें टैरिफ स्लैब के वाणिज्यक उपभोक्ताओं के मामले में वर्गीकरण चार किलोवाट व उससे ऊपर का स्लैब बनाया गया है। इसी तरह से लघु एवं मध्यम उद्योग के मामले में 20 किलोवाट व उससे ऊपर का स्लैब बनाया गया है। इसी प्रकार उद्योग रहित बल्क लोड के मामले में ऊर्जा खपत के अनुसार स्लैब खत्म कर वोल्टेज के अुनसार प्रस्तावित किया गया है जो अधिनियम की धारा 62 (3) का उलंघन है।

अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सबसे बड़ा चौंकाने वाला मामला यह है कि वर्ष 2016 में विद्युत नियामक आयोग द्वारा टैरिफ के सरलीकरण के लिये एक कमेटी बनायी गयी थी जिसमें उपभोक्ता परिषद सहित बिजली कम्पनियों के व अन्य औद्योगिक संगठनों के सदस्य नामित किये गये थे। जिसकी कई बैठकों में टैरिफ सरलीकरण के लिये स्लैब पर भी चर्चा हुयी।

उस समय पावर कारपोरेशन की उदासीनता के चलते टैरिफ सरलीकरण नहीं हो पाया और आज पावर कारपोरेशन मनमाने तरीके से अनिधनियम के खिलाफ टैरिफ संरचना परिवर्तित करने का प्रस्ताव आयोग को दे रहा है। जो अपने आप में प्रदेश की जनता के साथ बड़ा धोखा है। प्रदेश के उपभोक्ताओं की राय लेने के बाद उपभोक्ता परिषद ने आयोग में जनता टैरिफ फाइल करते हुये दरों में 16 प्रतिशत कमी का प्रस्ताव जबसे दिया है तबसे बिजली कम्पनियां चोर दरवाजे से आम जनता पर भार डालने का हर उपाय ढूंढ रही हैं।

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