2022 विधानसभा चुनाव से पहले एक साथ समाजवादी मंच पर आना चाहते हैं चाचा भतीजे
अन्य खबरे Aug 20, 2020 at 06:06 PM , 343लखनऊ! प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के मुखिया शिवपाल यादव ने उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपना मंथन शुरू कर दिया है। इटावा के जसवंतनगर से समाजवादी पार्टी के विधायक शिवपाल सिंह यादव ने अब समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन या फिर विलय से भी दो कदम आगे बढ़ा दिया है। इसके साथ उन्होंने प्रदेश सरकार पर कोरोना संक्रमण को लेकर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए सहकारी ग्राम विकास बैंक के चुनाव टालने की मांग की।प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के मुखिया शिवपाल यादव ने प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले संयुक्त समाजवादी मंच बनाने की पैरोकारी की। समाजवादी पार्टी ने अब गठबंधन करने से दो कदम आगे बढ़ते हुए शिवपाल सिंह यादव ने बड़ा दांव चला है। शवपाल सिंह यादव ने कहा कि 2015 से ही महागठबंधन बनाने की कोशिशें जारी है। इसके बाद पांच नवंबर 2016 को समाजवादी पार्टी के रजत जयंती समारोह में अजित सिंह, शरद यादव, लालू प्रसाद यादव और एचडी देवगौडा ने एक स्वर से मुलायम सिंह यादव को गठबंधन की कमान देने पर सहमति जतायी थी। यह कोशिश सिरे नहीं चढ़ सकी।शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि देश तथा प्रदेश में भाजपा की सरकार के आगे अब विपक्ष के सामने अपना वजूद बचाने की गंभीर चुनौती है। ऐसे हालात में भी विपक्ष बिखरा रहा तो लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि मेरी यह व्यक्तिगत आकांक्षा रही है कि समाजवादी धारा के सभी लोग एक मंच पर आएं और एक ऐसा तालमेल बने, जिसमें सभी को सम्मान मिल सके और प्रदेश का विकास हो सके। मैं चाहता हूं कि एक बार फिर 2022 के विधानसभा चुनाव से सभी समाजवादी एक मंच पर दिखें।उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है। जहां तक समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का प्रश्न है, उसके लिए मुझे अलग से कुछ कहने की जरूरत नहीं है। समाजवादी पार्टी संघर्ष के दम पर बनी थी, उसमें तीन दशक तक बहुत से समाजवादी विचारधारा के लोगों के साथ मैं भी नेताजी के साथ संघर्ष करता रहा। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी अगर ऐसा नहीं हुआ तो जनता की राय के अनुरूप पार्टी के उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने सीमित अवधि में शानदार संगठन खड़ा किया है और यूपी की सियासत को प्रभावित किया है। अगर 2019 में हमें विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल किया जाता तो लोकसभा चुनाव के परिणाम कुछ और होते।शिवपाल ने समाजवादी पार्टी में अपनी पार्टी के विलय के सवाल पर कहा कि समाजवाद पार्टी संघर्षो की देन है। मुझे उम्मीद है कि आने वाली पीढियां भी संघर्ष का रास्ता ही चुनेगी। उनका कहना था प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने कम समय में अपनी मेहनत व संघर्ष से प्रदेश की सियासत को काफी हद तक प्रभावित किया। अगर सभी समाजवादी एक मंच पर नहीं आते है तो अपने उम्मीदवार उतारे जाएंगे।



























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