थिएटर एंड फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन ने आयोजित की "कोरोना काल में रंगकर्मी" विषयक संगोष्ठी

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लखनऊ। थिएटर एंड फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन ने संस्था के डालीबाग सभागार में संगोष्ठी "कोरोना काल में रंगकर्मी" का आयोजन मंगलवार 25 अगस्त को किया। इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि देश की उन्नत संस्कृति को देश-विदेश में प्रसारित करने और जन-जागृति की दिशा में रंगकर्म अहम भूमिका अदा करता है पर कोरोना काल में मार्च से “रंगकर्म को ही क्वारंटाइन” कर दिया गया है। प्रदेश सरकार की अनीति के कारण प्रदेश भर के रंगकर्म पोषित कलाकार उपेक्षित हैं। थिएटर एंड फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.विपिन अग्निहोत्री ने बताया की प्रदेश में अनलॉक के काल में प्रवासी मजदूरों तक को रोजगार से जोड़ा गया पर प्रदेश के मूल रंगकर्मियों के प्रति ही सरकार उपेक्षित हो गई है। रंगकर्म जिसे पंचमवेद तक कहा गया है पर रंगकर्म के कलाकारों को सरकारी संरक्षण नहीं दिया जा सका है। प्रदेश सरकार की अनीति के कारण ही ऑडिटोरियम भी बंद पड़े हैं। एक ओर जिम-व्यायामशालाएं तक खोल दिये गए है पर मानसिक व्यायाम के केन्द्र ऑडिटोरियम के प्रति सरकार आंखें मूंद कर पड़ी है। सरकारी विभागों में पचास प्रतिशत तक कर्मचारी दैनिक कार्य कर रहे हैं वहीं विवाह समारोहों में भी पचास लोगों को शामिल होने की इजाजत दी जा रही है। ऐसे में बेहतर हो कि ऑडिटोरियम में भी दो गज की दूरी का पालन करवाते हुए रंगकर्म अनुष्ठान को प्रदेश सरकार संरक्षण दे। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (अठावले) के उत्तर प्रदेश व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष करन कुमार ने कहा कि रंगकर्म का कलाकार स्वभाव से स्वाभिमानी होता है इसलिए वह अपनी आवश्यकताओं को जगजाहिर नहीं कर पा रहा है। इसलिए बीते चार महीनों में वह परिवार से ही नहीं मन से भी टूट गया है। ऐसे में वह स्वयं आगे आए हैं और उन्होंने 11 हजार रुपए की आर्थिक मदद तक की है। करन कुमार ने कहा कि यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने आम जन का भी आवाह्न किया कि यथा संभव वह कलाकारों की मदद करें। जरूरतमंद कलाकारों के बच्चों का स्कूल आदि का खर्च स्वेच्छा से वहन करें। कास्टिंग मैनेजर कैफ़ी अली ने कहा कि जब पार्क खुल सकते हैं तो दो गज की दूरी पर मुक्ताकाशी मंचों पर रंगकर्म आदि सांस्कृतिक कार्य क्यों नहीं करवाये जा सकते हैं। थिएटर एंड फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव दबीर सिद्दीकी ने कहा कि अगर कलाकारों के प्रति जल्द ही कोई नीति प्रदेश सरकार नहीं घोषित करती है तो एसोसिएशन को मजबूरन संगठित हो बड़ा आन्दोलन करना होगा।

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