अदभुत साड़ी: माचिस की डिब्बे में समाने वाली साड़ी
परिवेश Jan 13, 2022 at 11:58 PM , 1264साड़ियां तो आपने एक से बढ़कर एक देखी होगी, खरीदी भी होंगी लेकिन क्या कभी कोई ऐसी साड़ी देखी है जो माचिस के डिब्बे में समा सकती हो ! बच्चों के खेलने वाली साड़ी नहीं बल्कि महिलाओं द्वारा पहनने वाली छगज लंबी साड़ी माचिस के डिब्बे में समा गई है.
भारत में साड़ियों का लंबा इतिहास रहा है. सदियों से भारत में महिलाओं द्वारा सदियों से साड़ी पहनने का प्रचलन रहा है. भारत के हर कोने में अलग-अलग तरह की साड़ियां पहनने का चलन है. इनमें सिल्क की साड़ी एक ऐसी साड़ी है जो ना सिर्फ पूरे देश में बल्कि पूरी दुनिया में पसंद की जाती है.कहा जाता है एक समय वह भी था जब साड़ियाँ उँगलियों में पहनने वाली अंगूठी से निकल जाया करती थीं .
बुनकर क्षेत्रों में रोजगार की बहुत संभावनाएं हैं.बुनकर टेक्सटाइल हब भी बना सकते हैं ,जिससे रोजगार भी बढ़ेगा. हथकरघा से वस्त्र उत्पादन कर आत्मनिर्भर बनने वाले बुनकरों में अनुभव एवं कौशल की कमी नहीं है
आज हम बात करने जा रहे है एक ऐसे ही बुनकर कारीगर की जिसने एक नया कारनामा कर दिखाया है. उसने छ गज की लम्बी साड़ी को माचिस के डिब्बे में पेक कर दिया .
बनारसी साड़ी दुनियाभर में मशहूर है. लेकिन क्या आपको पता है कि साउथ इंडिया जिसे हम दक्षिण भारत कहते हैं वहां भी एक से बढ़कर एक उत्कृष्टसाड़ियां मिलती हैं ! कांजीवरम और सिल्क साड़ी उन्हीं में से एक है जिसकी दुनियाभर में मांग है. आज हम आपको एक ऐसी ही सिल्क की साड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जो माचिस की डिब्बे में समा सकती है. ये साड़ी बनाई है हैदराबाद तेलांगनाके सिरसिला जिले के नल्ला विजय नामक बुनकर कारीगर ने .जो काफी तेजी से डिमांड में आ रही है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री केटी रामा राव समेत कई मंत्रियों को ये साड़ी दिखाई गई. सभी ने नल्ला विजय की तारीफ की
नल्ला विजय ने जिस साड़ी को सफलतापूर्वक बुना है जो शुद्ध रेशम से बनी है और एक माचिस की डिब्बी में फिट हो सकती है.
स्थानीय बुनकर कारीगरों का कहना है नल्ला विजय के शिल्प में उत्कृष्टता देखकर और उन्हें अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करते हुए देखकर हम सभी को बहुत गर्व होता है. तेलंगाना के नगर प्रशासन और शहरी विकास मंत्री केटी रामारावके ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से हाल ही में एक ट्वीट के जरिए ऐसी ही एक कहानी के बारे में बताया गया है. जिसमें एक प्रतिभाशाली बुनकर द्वारा बनाई गई अद्भुत रचना के बारे में बताया गया है.
नल्ला विजय नाम का बुनकर तेलंगाना के सिरसिला शहर का रहने वाला है. उन्होंने एक साड़ी को सफलतापूर्वक बुना है जो शुद्ध रेशम से बनी है क्योंकि इसे बेहद बारीक काता और बुना गया है. उन्होंने हाल ही में हैदराबाद में मंत्री एराबेली दयाकर राव, सबिता इंद्रारेड्डी और वी श्रीनिवास गौड़ के साथ-साथ केटी रामा राव की मौजूदगी में अपनी इस अदभुत साड़ी का प्रदर्शन किया .
11 जनवरी को शेयर किए जाने के बाद से इस पोस्ट को करीब 700 लाइक्स मिल चुके हैं और कई सपोर्टिव कमेंट्स मिले हैं. लोग बुनकर नल्ला विजय की जमकर तारीफ कर रहे हैं. एक ट्विटर यूजर ने पोस्ट किया, "महान प्रतिभा," दूसरे ने लिखा, "नमस्कार भाई," तीसरे यूजर ने लिखा, "विजय, आशा है कि आप बुनकरों की मजदूरी रेट बढ़ाने और रोज़गार का मौक़ा बढ़ाने के लिए काम करेंगे दुनिया में सबसे बेहतरीन साड़ियों की बात की जाए तो बनारसी साड़ी का जिक्र जरूर आता है. अपने खूबसूरत डिजाइन के लिए बनारसी साड़ी दुनियाभर में मशहूर है. लेकिन क्या आपको पता है कि साउथ इंडिया जिसे हम दक्षिण भारत कहते हैं वहां भी एक से बढ़कर एक साड़ियां मिलती हैं? कांजीवरम और सिल्क साड़ी उन्हीं में से एक है जिसकी दुनियाभर में मांग है.लेकिन नल्ला विजय ने जो साड़ी बनाई है वह तेजी से डिमांड में आ रही है.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के टी राम राव ने कारीगरों का तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने सुना था कि साड़ी माचिस के डिब्बे में समा सकती है लेकिन कभी देखा नहीं था सो पहली बार देख भी लिया. सीएम ने कारीगरों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है. कारीगरों ने सबीता इंदिरा रेड्डी को साड़ी गिफ्ट की. जानकारी के मुताबिक ये साड़ी बनने और माचिस की डिब्बी में पैक होने के लिए छहदिन का समय लगता है. कारीगरों के मुताबिक मशीन से इस साड़ी को बनाने मेंआठहजार रूपये लगते हैं जबकि हाथ से बनाने में बारहहजार रूपये की लागत आती है.
गौरतलब है कि साल 2015में जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा भारत के दौरे पर आए थे तो उस दौरान भी उन्हें ऐसी ही सुपर फाइन सिल्क की साड़ी गिफ्ट की गई थी.































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