दुर्गाशंकर मिश्र लकीर पीटने से बचें
हेडलाइंस Jan 08, 2022 at 12:58 PM , 555नए मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र को मैं तब से जानता हूं, जब वह बहुत कनिष्ठ आईएएस अधिकारी थे। उनकी चर्चा योग्य एवं ईमानदार अधिकारी के रूप में होती है। उनके साथ दो कठिनाइयां हैं। उत्तर प्रदेश में कभी वह मुख्यमंत्री मायावती के साथ पंचम तल पर थे। मायावती अनुभवहीन मुख्यमंत्री थीं। उनके समय में शशांक शेखर सिंह वास्तविक मुख्यमंत्री के रूप में सब काम किया करते थे। उन्हें मायावती ने कैबिनेट सचिव बना दिया था। उस समय जो स्थितियां थीं, उनमें अधिकारियों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिल पाता था। यहां तक कि सर्वश्रेष्ठ एवं योग्यतम आईएएस अधिकारियों में से एक देवेंद्र सिंह बग्गा मुख्य सचिव पद पर होकर भी लगभग अधिकारविहीन थे। इसीलिए उनकी प्रतिभा का भी कोई उपयोग नहीं हुआ। उस स्थिति में दुर्गाशंकर मिश्र की क्षमता का मुखर न हो पाना स्वाभाविक था तथा वह छिपे रह गए। यहां तक कि सीएसआई टावर में सबसे ऊपरी मंजिल पर जिस फ्लैट में वह रहते थे, उसके बाहर उन्होंने अपनी नामपट्टिका तक नहीं लगाई थी।
दुर्गाशंकर मिश्र के सामने दूसरी बड़ी समस्या यह है कि उन्होंने ऐसे समय कार्यभार संभाला है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव बिलकुल सिर पर है। अतएव मुख्य सचिव को इस समय विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता दिखाने का वक्त नहीं है। वैसे, यह सत्य है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार का लौटकर आना निश्चित माना जा रहा है तथा चुनाव के बाद यदि दुर्गाशंकर मिश्र कसौटी पर खरे उतरे तो उन्हें एक वर्ष के वर्तमान सेवाविस्तार के बाद पुनः सेवाविस्तार मिल सकता है। अभी तो यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि चुनाव की तिथियों की घोषणा के बाद चुनाव आयोग कहीं मुख्य सचिव बदल न दे। हालांकि ऐसी संभावना बहुत कम है।
दुर्गाशंकर मिश्र ने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद एक समीक्षा-बैठक की, जिसमें उन्होंने जिलाधिकारियों से कहा कि वे क्षेत्र-भ्रमण करके जनता से फीडबैक प्राप्त करें। उनकी पहली बैठक का उक्त सम्बोधन अखबारों में पढ़कर सिर पीट लेने का मन हुआ। वही पिटी-पिटाई लकीर पीटने वाला सम्बोधन! दुर्गाशंकर मिश्र को शायद अभी उत्तर प्रदेश की वास्तविकता की जानकारी नहीं है।
यह सत्य है कि यहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईमानदार एवं कठोर परिश्रम करने वाले अत्यंत क्षमतावान मुख्यमंत्री हैं। जिस प्रकार मोदी ने प्रधानमंत्री पद पर आरूढ़ होकर देश का माहौल बदला है, उसी प्रकार योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में यहां क्रांति की है। उन्होंने ऐसे-ऐसे जनहितकारी कार्य किए हैं, जो अन्य किसी मुख्यमंत्री के वश की बात नहीं थी।
लेकिन अंतर यह है कि मोदी को सहयोग के लिए कतिपय बहुत अच्छे मंत्री एवं अफसर मिले, पर योगी आदित्यनाथ के साथ ऐसी बात नहीं है। उन्हें पुराने ढर्रे पर चलने वाली भ्रष्ट एवं निष्क्रिय उस नौकरशाही से काम लेना पड़ रहा है, जो अपना रवैया बदलने को कदापि तैयार नहीं है।
इसका नतीजा यह है कि प्रदेश में निचले स्तर पर जनता की सुनने वाला कोई नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप उसकी समस्याओं का निराकरण कहीं नहीं हो पाता है। भ्रष्ट एवं निर्मम प्रशासन जनता को कितना दुखी किए हुए है, इसकी जानकारी या तो मुख्यमंत्री तक पहुंच नहीं पाती है अथवा मुख्यमंत्री भी उस नौकरशाही के सामने विवश हैं, जिसने मायावती, अखिलेश यादव आदि को अपने जाल में जकड़ रखा था। प्रदेश के जिलों में जनता की कोई सुनवाई नहीं होती, जिसके परिणामस्वरूप वह लखनऊ दौड़ लगाती है तो यहां भी उसकी सुनने वाला कोई नहीं होता है।
दुर्गाशंकर मिश्र ने ऊपर उल्लिखित बैठक में जिलाधिकारियों से कहा कि वे जनता से सम्पर्क स्थापित करें। दुर्गाशंकर मिश्र को शायद विदित नहीं है कि यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले बहुत बार कह चुके हैं तथा निर्देश दे चुके हैं कि जिलाधिकारी एवं मातहत अधिकारी नित्य पूर्वान्हकाल में जनता की फरियाद सुना करें और उसकी समस्याओं का पूरी तरह संतोषजनक रूप में निराकरण करें। किन्तु जिलों के अफसरों ने अपना रवैया नहीं बदला।
मुख्यमंत्री कई बार यह आदेश भी दे चुके हैं कि सभी अफसर अपना सीयूजी फोन हमेशा
ऑन रखें तथा फोन स्वयं उठाया करें। लेकिन पूरे प्रदेश में अफसर मुख्यमंत्री के उक्त आदेश का कभी पालन नहीं करते। जिलों में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक आदि तो अपने मोबाइल अपने अर्दलियों को दिए रहते हैं, जो फोन आने पर यदि उठाते भी हैं तो हमेशा यह उत्तर देते हैं कि ‘साहब मीटिंग में हैं’। वे अफसर कभी फोन करने वाले को रिंगबैक नहीं करते।
मुख्यमंत्री के खास अफसर के रूप में मशहूर अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी से एक बार जब मैंने इस बात का उल्लेख किया था तो उनका उत्तर सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ था। उन्होंने कहा कि अफसर अगर फोन उठाने लगें तो काम कब करेंगे? अफसरशाही का यह घातक एवं जनविरोधी रवैया उसकी स्थाई मनोवृत्ति बन गया है। वह जनता को कीड़ेमकोड़े की तरह समझकर उसकी फरियाद सुनना फालतू काम मानती है। जबकि उसे जनता के पैसे से गठरीभर वेतन और टोकरेभर भत्ते उसकी सेवा के लिए ही दिए जाते हैं। जनता के फरियादपत्र पर हस्ताक्षरों की चिड़िया बैठती रहती है तथा वह फरियादपत्र अनेक स्तरों से गुजरते हुए अंत में अदृश्य अवस्था को प्राप्त हो जाता है। यही कारण है कि जनता की समस्याएं कभी नहीं हल होतीं और वह यातना भुगतती रहती है। जबकि जनता की समस्याओं का निराकरण ग्रामों एवं शहरी क्षेत्रों में निचले स्तर पर ही तत्काल कर दिया जाना चाहिए।
अभी तक की परिपाटी के अनुसार अफसर फील्ड की तैनाती मौजमस्ती एवं रोबदाब के लिए चाहते हैं। भ्रष्ट अफसरों का लक्ष्य फील्ड में रहकर अपनी तिजोरी भरना होता है। यदि जांच कराई जाय तो ऐसे तमाम भ्रष्ट अफसर व कर्मचारी करोड़पतियों एवं अरबपतियों के रूप में मिल जाएंगे तथा अवकाशग्रहण करने के उपरांत भी शाही जीवन व्यतीत करते हुए मिलेंगे। मुश्किल यह है कि भ्रष्ट अफसरों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कभी कोई कार्रवाई नहीं होती है। केवल कभी-कभी छिटपुट कार्रवाइयों की खबरें मिलती हैं।
दुर्गाशंकर मिश्र को चाहिए कि फील्ड में उन्हीं अफसरों की तैनाती करें, जो ईमानदार तो हों ही, यह गारंटी भी दें कि वे वहां जाकर अपना निजी जीवन भूलते हुए एवं पूर्णरूपेण अहंकारविहीन होकर दिन-रात विनम्रता से जनता की सेवा करेंगे और उसकी समस्याओं का वास्तविक रूप में निराकरण करने में लगे रहेंगे। ऐसा हुए बिना जनता की पीड़ा कभी कम नहीं होगी।
दुर्गाशंकर मिश्र स्वयं अहंकारविहीन एवं शालीन व्यक्ति हैं, इसलिए यदि वह जनता का वास्तव में कल्याण चाहते हैं तो उन्हें नौकरशाही का रवैया अनिवार्यगा। उन्हें समस्त अफसरों एवं कर्मचारियों को कड़ाई से यह निर्दिष्ट करना होगा कि वे पूर्णतया अहंकारविहीन होकर अपने को जनता का मालिक नहीं, बल्कि सेवक समझें और उसकी सेवा करना अपना प्रथम कर्तव्य मानें। श्याम कुमार वरिष्ठ पत्रकार































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