किन्नर ने रामनगरी में अनोखी परंपरा की शुरुआत

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अयोध्या। मां सीता के जन्म स्थल में जन्मी और भगवान राम की जन्म स्थली को अपना कर्म स्थल बनाने वाले किन्नर ने जिस अनोखी परंपरा की शुरुआत की वह आज भी कायम है। इस अनोखी परंपरा के जरिए समाज में किन्नरों के प्रति आदर का भाव बढ़ रहा है। दरअसल हम बात कर रहे हैं समाज सेवा के जरिए सत्ता के गलियारों तक कदम रखने वाली किन्नर गुलशन बिंदु की जिनकी मृत्यु के बाद उनके शिष्य सामाजिक कार्यों को गति दे रहे हैं। गरीबों को संबल प्रदान करना और असहाय बच्चों को शिक्षा, विवाह समेत कई सामाजिक कार्य गुलशन बिंदु के किन्नर शिष्यों ओर से आज भी किए जा रहे हैं।रामनगरी अयोध्या का किन्नर समाज गरीब असहाय और अनाथ बच्चों को सहायता करने में पीछे नहीं है। सीतामढ़ी में जन्मी किन्नर समाजसेवी गुलशन बिंदु ने जो जिस परंपरा की शुरुआत की उसे उनके शिष्य आज भी महत्व दे रहे हैं। गुलशन बिंदु आज हमारे बीच में नहीं है लेकिन उन्होंने आमतौर पर ही दृष्टि से देखे जाने वाले किन्नर समाज को अपनी सामाजिक कार्यों के जरिए जो सीख दी उसका पालन कर किन्नर समाज के लोग अन्य समाज में अपने प्रति आदर की भावना उत्पन्न कर रहे हैं। गुलशन बिंदु असहाय बच्चों के लिए यतीमखाना चलाती थीं। उन्होंने 250 से अधिक गरीब लड़कियों की शादी करवाई। गुलशन बिंदु के इसी कार्य को अब उनके शिष्य पिंकी किन्नर, राखी किन्नर समेत करीब 18 से 20 शिष्य आगे बढ़ा रहे हैं।वही पिंकी मिश्र किन्नर समाज से हैं। अयोध्या में रहती हैं और किन्नर गुलशन बिंदु को अपना गुरु मानती हैं। लिहाजा पिंकी भी अब के रास्ते पर चल पड़ी हैं। वह कहती हैं कि मैं अपने गुरु कितना समाज सेवा तो नहीं कर सकती लेकिन मुझसे जितना हो सकता है उतना मैं समाज के लिए करने के में तत्पर हूं। पिंकी मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अपने संरक्षण में पांच बेटियां और दो बेटों को रखा है। एक बेटी की शादी हो रही है। बाकी चार बेटियां और एक बेटा पढ़ रहा है। एक बेटा अभी छोटा है। किन्नर पिंकी ने कहा कि हमें समाज के प्रति सम्मान की भावना रखनी चाहिए। सामाजिक कार्यों से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पता नहीं कि कर्मों का फल हम किन्नर समाज में जन्म लेकर भुगत रहे हैं ऐसे में हमें अपना जीवन सुधारने के लिए नेक कर्म करने चाहिए।

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