पुत्र के मामले में शादी को आधार बनाकर पच्चीस वर्ष की उम्र पूरी करने तक, फेमिली पेंशन नहीं रोंकी जा सकती

जनपत की खबर , 526

शादी को आधार बनाकर पुत्र की फेमिली पेंशन नहीं रोंक सकती सरकार :विजय कुमार पाण्डेय   

लखनऊ। सेना कोर्ट लखनऊ ने बेटे को पच्चीस वर्ष की उम्र तक आर्डिनरी फेमिली पेंशन दिए जाने का आदेश सुनाया l मामला यह था कि प्रतापगढ़ निवासी रमेश कुमार पाल के पिता की मृत्यु के बाद फेमिली पेंशन ले रहे थे, लेकिन 21 मई, 2002 को भारत सरकार रक्षा-मंत्रालय द्वारा यह कहते हुए उनकी फेमिली पेंशन बंद कर दी गई कि 20 मई,2002 को उन्होंने विवाह कर लिया है, और विवाह के बाद फेमिली पेंशन देने का प्रावधान नहीं है l
वादी द्वारा 2002 से प्रयास किया जाता रहा लेकिन भारत सरकार ने एक न सुनी, उनकी सभी मांगों को ख़ारिज कर दिया, तब उन्होंने अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय के माध्यम से सेना कोर्ट में 25 वर्ष की उम्र तक पेंशन देने संबंधी वाद दायर किया, सुनवाई के दौरान भारत सरकार के अधिवक्ता द्वारा दलील दी गयी कि भारत सरकार की पॉलिसी 3 फरवरी,1998 और आर्मी पेंशन रेगुलेशन, 2008 शादी के बाद फेमिली पेंशन न दिए जाने का प्रावधान करती है, इसके विपरीत वादी के अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय ने अपने मुवक्किल का जोरदार पक्ष रखते हुए कहा कि जिस पालिसी और रेगुलेशन का हवाला देकर मेरे मुवक्किल की फेमिली पेंशन बंद कर दी गयी, वह उस पर लागू ही नहीं होती, क्योंकि पॉलिसीगत निर्णय रेगुलेशन को अतिक्रमित नहीं कर सकते, दूसरी तरफ आर्मी पेंशन रेगुलेशन, 1961 के पैरा-219 में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि पुत्री के मामले में तो शादी करने के बाद पेंशन रोंकी जा सकती है, लेकिन पुत्र के मामले में शादी का उल्लेख ही नहीं किया गया है, सिर्फ पच्चीस साल की उम्र का ही जिक्र है, जिससे स्पष्ट है कि पुत्र की फेमिली पेंशन शादी करने के बावजूद सरकार पच्चीस साल की उम्र तक बंद नहीं कर सकती l 
दोनों पक्षी की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश उमेश चन्द्र श्रीवास्तव और अभय रघुनाथ कार्वे की खण्ड-पीठ ने फैसला सुनाया कि वादी की फेमिली पेशन शादी होने के बावजूद भी रोंकी नहीं जा सकती, क्योंकि पेंशन रेगुलेशन. 1961 का पैरा 219 इसकी इजाजत नहीं देता, इसलिए वादी पच्चीस वर्ष की उम्र तक फेमिली पेंशन पाने का हकदार है, खण्ड-पीठ ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में लिमिटेशन का कानून लागू नहीं होता, जिसमें वादी लगातार अपने अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहा होl         
   लखनऊ।  
 (विजय कुमार पाण्डेय)
9415463326

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