ग्रेटर नोएडा गौतमबुद्ध नगर: इस बार भी नहीं लगेगा ऐतिहासिक बाराही मेला, मंदिर प्रबंधन ने बताई बड़ी वजह

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नोयडा।

कोरोना संक्रमण का असर धार्मिक अनुष्ठानों पर भी उतना ही गहरा है। गौतमबुद्ध नगर में लगने वाले सबसे बड़े 12 दिवसीय परंपरागत और ऐतिहासिक बाराही मेले का आयोजन इस बार फिर कोविड-19 की वजह से नहीं किया जाएगा। शिव मंदिर सेवा समिति सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा ने बुधवार को सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। इसमें तय किया गया कि लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए इस बार मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। बुधवार को समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी और महासचिव ओमबीर बैसला की अगुवाई में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें आगामी 26 अप्रैल से 8 मई तक लगने वाले ऐतिहासिक बाराही मेले के आयोजन पर विस्तार से चर्चा हुई। 


जनपद में कोविड-19 की वजह से लागू धारा 144 को ध्यान में रखते हुए बैठक में सिर्फ चार मुख्य पदाधिकारियों को ही बुलाया गया। अन्य पदाधिकारियों को ऑनलाइन और फोन के माध्यम से शामिल किया गया। आपसी विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया कि कोरोना से बचाव के लिए इसकी चेन तोड़ना जरूरी है। इसके लिए सामाजिक दूरी सबसे आवश्यक। जबकि मेले में रोजाना लाखों की संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं। इस बार इस ऐतिहासिक मेले में और ज्यादा लोगों के जुटने की संभावना थी। इसलिए सेवा समिति के पदाधिकारियों ने जनहित को ध्यान में रखते हुए इस बार भी मेले का आयोजन नहीं कराने का निर्णय लिया। 

*परंपरा जारी रखने के लिए पूर्णमासी को यज्ञ होगा*

मंदिर की प्राचीन विरासत और परंपरा को बरकरार रखने के लिए 27 अप्रैल पूर्णमासी के यज्ञ को हवन और भजनों से पूर्ण कराया जाएगा। इसमें सीमित संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारियों को शामिल होने का मौका दिया जाएगा। समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी ने कहा कि यज्ञ और हवन कार्यक्रम में सीमित संख्या में कार्यकर्ताओं को बुलाया जाएगा। हमारा मकसद कोरोना को हराना है। इसके लिए सामाजिक दूरी बेहद जरूरी है। इस को ध्यान में रखते हुए कम संख्या में कार्यकर्ता यहां आएंगे। सभी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखेंगे। मास्क लगाएंगे और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करेंगे। बुधवार को हुई बैठक में अध्यक्ष धर्मपाल भाटी, डॉक्टर ईश्वर देवघर, लक्ष्मण सिंह और ओमबीर बैसला मौजूद रहे।

*पिछले साल भी नहीं हो सका था आयोजन*

बताते चलें कि ऐतिहासिक बाराही मेला पिछले साल भी कोरोना वायरस की भेंट चढ़ गया था। साल 2020 में अप्रैल महीने में कोरोना वायरस का संक्रमण अपने उफान पर था। तब पूरे देश में लॉकडाउन लागू था। सामाजिक और धार्मिक गतिविधियां तो दूर, सड़कों पर निकलना तक दूभर था। इस वजह से इस परंपरागत ऐतिहासिक मेले का आयोजन पिछले साल भी नहीं किया जा सका था।

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