मुख्यमंत्री आवास पर भारत-जापान की युवा पीढ़ी का मिलन, दोस्ती और भविष्य का संदेश गूंजा
जनपत की खबर Aug 21, 2026 at 01:43 PM , 13**लखनऊ, 21 अगस्त।** मुख्यमंत्री आवास शुक्रवार को भारत और जापान की युवा पीढ़ी के आत्मीय मिलन का साक्षी बना। उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक के क्रम में आयोजित विशेष कार्यक्रम **‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’** में जापान के यामानाशी प्रांत से आए 13 विद्यार्थियों ने लखनऊ के स्कूली बच्चों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम में कूटनीति की औपचारिकताओं से इतर दो देशों की संस्कृतियों, परंपराओं और भविष्य के सपनों का सहज संगम देखने को मिला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी विद्यार्थियों और उनके फैकल्टी सदस्यों का आत्मीय स्वागत करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत जापानी अभिवादन **‘ओहायो गोजाइमासु’** से की। उन्होंने कहा कि यह केवल विद्यार्थियों का मिलन नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों, दो परंपराओं और दो देशों की युवा पीढ़ियों का संवाद है। आज के यही विद्यार्थी आने वाले समय में भारत-जापान संबंधों के सबसे प्रभावशाली राजदूत बन सकते हैं।
### गांव अलग, भाषा अलग, लेकिन भविष्य का सपना एक
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बच्चा लखनऊ के किसी गांव से आता है और दूसरा जापान के किसी गांव से, दोनों की भाषाएं अलग हैं, लेकिन अपने भविष्य की कहानी लिखने का संकल्प समान है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति और जापान की तकनीक, अनुशासन, गुणवत्ता एवं नवाचार की क्षमता जब साथ आएगी तो दोनों देशों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
उन्होंने कहा कि अगले वर्ष भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव से पहले दोनों देशों के विद्यार्थियों का यह संवाद भविष्य के रिश्तों के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है।
### ‘पर्यटक नहीं, साझा सभ्यता को समझें’
योगी ने कहा कि जापान से आए विद्यार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर है। अयोध्या, मथुरा, वाराणसी और सारनाथ जैसे स्थान भारत की सभ्यतागत चेतना से जुड़े हैं। जापानी विद्यार्थियों ने आगरा में ताजमहल देखा है और आगे वाराणसी तथा सारनाथ का भ्रमण भी करेंगे।
उन्होंने कहा कि जापान की नई पीढ़ी भारत को केवल बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक साझा सभ्यतागत मित्र के रूप में जाने, यही ऐसे कार्यक्रमों की वास्तविक उपलब्धि होगी। वहीं भारतीय विद्यार्थियों को जापान की कार्य संस्कृति, अनुशासन, स्वच्छता, समयबद्धता, टीमवर्क, नवाचार और पारंपरिक जीवन मूल्यों से सीखने का अवसर मिलेगा।
### ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और जापानी सामाजिक सामंजस्य
मुख्यमंत्री ने भारत के **‘वसुधैव कुटुम्बकम्’** के दर्शन और जापान के सामाजिक सामंजस्य की भावना के बीच समानता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है। इसी भावना के साथ दोनों देशों की युवा पीढ़ी एक-दूसरे की संस्कृति, विचार और जीवन पद्धति को समझकर भविष्य में रिश्तों को और मजबूत कर सकती है।
उन्होंने कहा कि जापान की ताकत सेल्फ डिसिप्लिन, प्रिसिजन, क्वालिटी, टीमवर्क और इनोवेशन में है, जबकि भारत की शक्ति युवा प्रतिभा, विविधता, सृजनात्मकता और सबको साथ लेकर चलने की भावना में है। दोनों देशों की श्रेष्ठ क्षमताओं का समन्वय वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक परिणाम दे सकता है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से एक-दूसरे की भाषा सीखने के साथ भावनाओं को समझने और संस्कृतियों का सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संबोधन का समापन जापानी भाषा में **‘अरिगातो गोजाइमासु’** कहकर किया।
### गवर्नर नागासाकी बोले- दोस्ती को एक दिन तक सीमित न रखें
यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को एक-दूसरे को समझने और संवाद करने का यह अवसर दोनों देशों को करीब लाने वाला है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच समानताओं के साथ-साथ भिन्नताओं को समझना भी जरूरी है।
गवर्नर ने विद्यार्थियों से अपील की कि यह मुलाकात केवल एक दिन का कार्यक्रम बनकर न रह जाए। भारतीय और जापानी विद्यार्थी अपने बीच बनी दोस्ती को आगे बढ़ाएं और इसे दीर्घकालिक संबंधों में बदलें। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की युवा पीढ़ी मिलकर भारत-जापान मैत्री को नई मजबूती दे सकती है।
### जापानी गीत से गूंजा मुख्यमंत्री आवास, ईशान ने सुनाया रामभक्ति गीत
कार्यक्रम में जापानी विद्यार्थियों ने अपनी भाषा में सामूहिक गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद भारतीय विद्यार्थियों की ओर से ईशान ने भगवान श्रीराम को समर्पित **‘कौशल्या दशरथ के नंदन’** गीत प्रस्तुत कर माहौल को भावपूर्ण बना दिया। दो अलग भाषाओं में प्रस्तुत गीतों ने यह संदेश दिया कि भाषा और संस्कृति अलग होने के बावजूद संगीत और भावनाएं लोगों को जोड़ने का काम करती हैं।
लखनऊ की छात्रा अक्षरा पांडेय ने जापानी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में जापानी कार्टून चरित्र डोरेमोन तक बच्चों की यादों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने जापानी विद्यार्थियों को अतिथि नहीं बल्कि अपना बताते हुए जापानी भाषा में **‘अरिगातो’** कहकर उनका स्वागत किया।
### ताजमहल, बिंदी और भारतीय सड़कों ने खींचा ध्यान
जापानी विद्यार्थियों ने भारत यात्रा के अनुभव भी साझा किए। छात्र कजामा ने बताया कि भारत आना उनके लिए विशेष अनुभव है और लोगों का मित्रवत व्यवहार उन्हें बहुत प्रभावित कर रहा है। ताजमहल की सुंदरता और भव्यता ने भी उन्हें आकर्षित किया।
जापानी छात्रा मियागी मोतो ने भारत की संस्कृति को करीब से समझने के अनुभव को खास बताया। उन्होंने पहली बार बिंदी लगाने और ताजमहल देखने के अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्कृतियों को समझना और एक-दूसरे का सम्मान करना बेहद जरूरी है।
### ओरिगेमी में शांति और मित्रता का संदेश
जापानी विद्यार्थियों ने ओरिगेमी कला के माध्यम से भी भारत-जापान मैत्री का संदेश दिया। कागज से बनाए गए सुंदर ओरिगेमी मुख्यमंत्री को भेंट किए गए। बच्चों के हाथों से तैयार इन कलाकृतियों में शांति, मित्रता और दोनों देशों की युवा पीढ़ियों के साथ आगे बढ़ने की भावना दिखाई दी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जापानी और भारतीय विद्यार्थियों के साथ सेल्फी भी ली। इस दौरान बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। औपचारिक कार्यक्रम के बीच यह पल दोनों देशों के विद्यार्थियों के लिए यादगार बन गया।
### निवेश से आगे बढ़कर मानवीय रिश्तों का संवाद
मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित यह कार्यक्रम भारत-जापान संबंधों के आर्थिक और निवेश पक्ष से आगे बढ़कर मानवीय रिश्तों और सांस्कृतिक साझेदारी की तस्वीर पेश करता नजर आया। यामानाशी के 13 विद्यार्थियों और लखनऊ के बच्चों के बीच हुए संवाद में गीत, कला, संस्कृति और अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।
एक ओर जापान के विद्यार्थी थे, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के बच्चे। भाषाएं अलग थीं, पर दोस्ती और भविष्य की बेहतर दुनिया का सपना एक था। **‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ ने इसी भावना को सामने रखा कि आज के बच्चों के बीच बनी दोस्ती कल भारत-जापान के और मजबूत रिश्तों की नींव बन सकती है।**































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