लोकसभा में विदेश मंत्रालयः पड़ोसियों संग मजबूत हुआ डिजिटल भुगतान
जनपत की खबर Aug 03, 2026 at 09:15 PM , 10नई दिल्ली। भारत सरकार अपनी 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत अपने सीमावर्ती देशों के साथ व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा के मोर्चे पर क्षेत्रीय सहयोग को लगातार मजबूत कर रही है। लोकसभा में सांसद यूसुफ पठान द्वारा पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत ने अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ एक गतिशील और परिणाम-उन्मुख कूटनीतिक रोडमैप अपनाया है। इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण एशियाई क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति देना और सुरक्षा चुनौतियों का सामूहिक मुकाबला करना है।
विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, सरकार द्वारा उठाए गए नए कदमों का ब्यौरा देते हुए राज्य मंत्री सिंह ने बताया कि भारत अब पड़ोसी देशों- नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, भूटान, अफगानिस्तान और मालदीव के साथ केवल पारंपरिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल और वित्तीय कनेक्टिविटी के नए युग में प्रवेश कर चुका है। इस नीति के तहत भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए समझौते किए हैं, जिससे सीमा पार व्यापार और पर्यटन बेहद सुगम हो गया है।
इसके अलावा, भारत अपनी विशेषज्ञता का लाभ देते हुए पड़ोसियों में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) के निर्माण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों और अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा सहयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार नई पहलों के दायरे को व्यापक करते हुए सिर्फ परिवहन मार्ग ही नहीं, बल्कि ऊर्जा साझेदारी के तहत सीमा पार बिजली ग्रिड और पेट्रोलियम पाइपलाइनों का नेटवर्क बिछाया जा रहा है। पारंपरिक सुरक्षा के साथ-साथ अब जलवायु सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, मानव सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे आधुनिक क्षेत्रों को विशेष रूप से इन समझौतों में शामिल किया गया है।
इसके साथ ही, सीमा पार व्यापार को निर्बाध बनाने के लिए इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) का आधुनिकीकरण किया गया है और रेलवे कूटनीति के जरिए यात्रियों व माल ढुलाई की कनेक्टिविटी को नए स्तर पर ले जाया गया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में किया जा रहा यह बहुपक्षीय सहयोग न केवल भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखेगा, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत को एक सबसे विश्वसनीय और जिम्मेदार रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करेगा।































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